August 6, 2026

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6 साल बाद भारत-चीन में सीमा व्यापार शुरू, दोनों देशों के संबंधों में होगा सुधार

Udaan Desk. भारत और चीन ने अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 6 साल बाद सीमा व्यापार फिर से शुरू कर दिया है। दोनों देश सिक्किम में नाथू ला, उत्तराखंड में लिपुलेख और हिमाचल प्रदेश में शिपकी ला दर्रे के जरिए सीमा व्यापार शुरू करने पर सहमत हुए हैं। 2019 में कोरोनावायरस महामारी और उसके बाद गलवान घाटी हिंसा के बाद सीमा व्यापार बंद कर दिया गया था।

20 व्यापारियों का दल तिब्बत रवाना
व्यापार शुरू होने के बाद आज 20 भारतीय व्यापारियों और सहायकों को लिपुलेख दर्रे पर चीनी अधिकारियों के सुपुर्द किया गया। व्यापारियों के पहले दल में 16 व्यापारी और उनके 4 सहायक शामिल हैं। ये व्यापारी तिब्बत में स्थित तकलाकोट मंडी पहुंच चुके हैं। पहले 62 व्यापारियों को तिब्बत जाने की अनुमति थी। इन व्यापारियों में ज्यादातर वे लोग हैं, जिनका सामान 2019 में अचानक व्यापार बंद होने के चलते तकलाकोट स्थित गोदामों और दुकानों में पड़ा हुआ है।

भारत से 36 सामानों का होगा व्यापार
भारत 36 स्वीकृत उत्पादों का चीन को निर्यात कर सकता है। इनमें हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम के सामान, कंबल, खेती के औजार, प्रोसेस्ड फूड, सूखी सब्जियां, मसाले, रेडीमेड कपड़े, बर्तन और पारंपरिक धार्मिक सामान शामिल हैं।

वहीं, तिब्बत की तरफ से होने वाले आयात में कपड़े, जूते, याक के उत्पाद, मक्खन, बोरेक्स, बकरियां, रजाइयां और दूसरे स्वीकृत सामान शामिल हैं। एक व्यापारिक सीजन के दौरान 400 व्यापारियों को परमिट जारी किए जाएंगे।

व्यापार शुरू करने पर कैसे बनी सहमति?
अगस्त, 2025 में चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत आए थे। तब उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से बातचीत की थी। यात्रा के बाद जारी एक संयुक्त बयान में नाथू ला, लिपुलेख और शिपकी ला के माध्यम से सीमा व्यापार की बहाली की घोषणा की गई थी। हालांकि, खराब मौसम और सड़क मरम्मत कामों के चलते एक साल तक व्यापार शुरू नहीं हो सका।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को होगा फायदा
हालांकि, इन दर्रों से मौसम और अन्य वजहों के चलते भारी मात्रा में व्यापार तो नहीं होता है, लेकिन ये स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। यहां व्यापार की मात्रा और अवधि छोटी होती है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह कदम अहम है, क्योंकि इससे परिवहन संचालकों और रसद सेवा प्रदाताओं को रोजगार मिलता है। छोटे व्यवसायों और व्यापारियों को व्यावसायिक गतिविधियों तक पहुंच मिलती है, जो पर्वतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम है।

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