Udaan Desk. कैपिटल मार्केट रेगुलेटरी SEBI ने अपनी सेटलमेंट व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत 10 लाख रुपये तक की सेटलमेंट रकम वाले मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शुरू करने और कई नियामकीय कार्यवाहियों के एक साथ निपटान पर लगने वाली अतिरिक्त 20 प्रतिशत रकम हटाने का प्रस्ताव है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक कंसल्टेंट पेपर में मौजूदा सेबी (निपटान कार्यवाही) विनियमन, 2018 की जगह नया स्ट्रक्चर लाने का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद नियामकीय मामलों के निपटान को आसान, तेज और अधिक स्पष्ट बनाना है।
10 लाख तक के मामलों में फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट
प्रस्तावित फास्ट-ट्रैक व्यवस्था में 10 लाख रुपये तक की निपटान राशि वाले मामलों में उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति (HPC) की बैठक की जरूरत नहीं होगी। ऐसे मामले आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजे जा सकेंगे। सेबी के अध्ययन के मुताबिक, जिन मामलों में निपटान प्रस्ताव खारिज हो गया या वापस ले लिया गया और बाद में नियामकीय कार्रवाई में जुर्माना लगाया गया, उनमें प्रस्तावित निपटान राशि अंतिम जुर्माने की राशि से औसतन करीब आठ गुना अधिक थी। प्रस्तावित स्ट्रक्चर में यह अनुपात घटाकर करीब चार गुना करने की योजना है।
सेटलमेंट राशि का अनुपात घटकर होगा आधा
सेबी ने सिक्योरिटी रकम को सिक्योरिटीज लॉ के तहत निर्धारित कम से कम जुर्माने से जोड़ने का भी प्रस्ताव किया है। आवेदक की कैटेगरी के आधार पर अलग-अलग गुणक लागू होंगे। गलत तरीके से कमाया गया फायदा या निवेशकों को हुए नुकसान की अलग से वसूली जारी रहेगी। नियामक ने राहत देने वाले कारकों की अधिकतम संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव किया है। इनमें कंपनी के नियंत्रण या प्रबंधन में बदलाव और आवेदक का स्वतंत्र निदेशक होना जैसे कारक शामिल किए जा सकते हैं।
4 सितंबर तक मांगे गए सुझाव
गलत तरीके से अर्जित फायदे की वापसी पर ब्याज के संबंध में सेबी ने अंतिम आदेश नहीं होने की स्थिति में लेनदेन की तारीख से निपटान आवेदन दाखिल करने तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज का प्रस्ताव किया है। अंतिम आदेश जारी हो जाने की स्थिति में लेनदेन की तारीख से आदेश तक नौ प्रतिशत और उसके बाद आवेदन दाखिल करने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगाया जाएगा। इसके अलावा ब्याज पर ब्याज भी नहीं लिया जाएगा। सेबी ने लंबित मामलों में निपटान आवेदन दाखिल करने की मौजूदा 60 दिन की समयसीमा बढ़ाने का भी प्रस्ताव किया है। नियामक ने इन प्रस्तावों पर चार सितंबर तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

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