September 2, 2026

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राम मंदिर के पहले सीईओ बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, ट्रस्ट के तीन नए सदस्य भी घोषित

उड़ान डेस्क। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ ) को लेकर निर्णय हो गया है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ट्रस्ट के सीईओ चुने गए हैं। बुधवार को अयोध्या की मणिरामदास छावनी में महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में हुर्ठ ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ ही आमंत्रित सदस्य भी मौजूद रहे।

राम मंदिर के सीईओ पद के लिए 5585 आवेदन आए थे। इन आवेदनों का बहुस्तरीय मूल्यांकन दिल्ली-एनसीआर, पुणे और उड़ीसा के संबलपुर में विशेषज्ञों की टीमों ने किया। मंगलवार को राम मंदिर ट्रस्ट को सर्च कमेटी के सचिव समीर पांड्या ने पैनल सौंपा। इसके बाद बुधवार को इस पैनल पर विचार कर फाइनल निर्णय लिया गया। राम मंदिर के सीईओ पद पर आखिरी समय तक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रिटायर्ड आईपीएस राजेश पांडेय की नियुक्ति की चर्चा थी। हालांकि, ट्रस्ट की बैठक में इस संबंध में अलग निर्णय सामने आया है।

वहीं, ट्रस्ट की बैठक में तीन नए सदस्यों की भी घोषणा की गई है। नए शामिल होने वाले सदस्यों में मदन मोहन पांडेय अयोध्या के, महेश भागचंदका दिल्ली के और निर्मला यादव अयोध्या से हैं।

काम और मुख्य ज़िम्मेदारियाँ
मंदिर परिसर के CEO के तौर पर, ग्रुप कैप्टन मिश्रा 70 एकड़ में फैले राम जन्मभूमि परिसर के रोज़ाना के प्रशासनिक कामकाज की देखरेख करेंगे। उनकी ज़िम्मेदारी में तीर्थ स्थल की आध्यात्मिक पवित्रता को बनाए रखते हुए मैनेजमेंट के कामों को प्रोफेशनल बनाना शामिल है।

उनके प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं:
– भीड़ पर नियंत्रण और तीर्थयात्रियों की भलाई: बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए सुचारू कतार प्रबंधन प्रणाली और प्रवेश-निकास नियमों को लागू करना।

– बुनियादी ढांचे का काम पूरा करना: मंदिर परिसर के बाकी निर्माण कार्यों में तालमेल बिठाना, जिसमें सहायक मंदिर और आने वाले लोगों के लिए सुविधाएँ शामिल हैं।

– सुरक्षा व्यवस्था: मज़बूत सुरक्षा घेरा बनाए रखने के लिए राज्य पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और आंतरिक सुरक्षा टीमों के साथ मिलकर काम करना।

– कामकाज में दक्षता: स्टाफ़ मैनेजमेंट, साफ़-सफ़ाई अभियान, IT इंफ्रास्ट्रक्चर और तीर्थयात्री सुविधा केंद्रों के कामकाज को बेहतर और सुव्यवस्थित बनाना।

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