September 2, 2026

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महाराष्ट्र : खुले तेल पर सख्ती से गरीब परिवारों का रसोई बजट बिगड़ा, ₹170 का पैकेट खरीदने की बनी मजबूरी

 

Udaan Desk. महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने स्वास्थ्य सुरक्षा और मिलावट को रोकने के लिए खुले खाद्य तेल की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसका सीधा असर खुले तेल का कारोबार करने वाले व्यापारियों और गरीब परिवारों पर दिख रहा है। खाद्य तेल की खुले में बिक्री पर सख्ती का सीधा असर अब रोज कमाने खाने वाले गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर दिखाई देने लगा है। खुले में अपनी जरूरत के अनुसार 30 से 40 रुपये का तेल खरीदकर काम चलाने वाले लोगों के सामने अब 160 से 170 रुपये तक का पैकेट खरीदने की मजबूरी खड़ी हो गई है। ऐसे में सीमित आमदनी में घर चलाने वाले परिवारों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गरीब परिवारों का कहना है कि उन्हें एक साथ बडी मात्रा में तेल खरीदने की आवश्यकता नहीं होती।

कई परिवार रोजाना या दो-तीन दिन की जरूरत के हिसाब से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। पहले वे अपनी जेब और जरूरत के अनुसार 30, 40 या 50 रुपये का खुला तेल खरीद लेते थे लेकिन खुले तेल की बिक्री पर सख्ती होने के बाद दुकानदार अब पैकेट में ही तेल देने की बात कह रहे हैं। रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों, घरेलू कामगारों, छोटे काम-धंधे करने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एकमुश्त 160 से 170 रुपये खर्च करना आसान नहीं है।

खुले तेल पर सख्ती से गरीबों का बजट बिगड़ा
दिनभर की कमाई में से भोजन, किराया, बच्चों की पढ़ाई, गैस, बिजली और अन्य जरूरी खर्च निकालने के बाद रसोई का बजट पहले ही सीमित रहता है। ऐसे में जिन परिवारों को तत्काल केवल 30-40 रुपये के तेल की आवश्यकता होती है, उन्हें मजबूरी में कई गुना अधिक राशि का पैकेट खरीदना पड़ रहा है। इससे उनके दैनिक खर्च का संतुलन बिगड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर खुले तेल की बिक्री पर कार्रवाई की जा रही है लेकिन गरीब उपभोक्ताओं का कहना है कि नियमों को लागू करते समय उनकी आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि मिलावटी तेल की बिक्री पर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन साथ ही जरूरतमंदों के लिए किफायती विकल्प भी उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।

तेली समाज भी परेशान
इस सख्ती से तेली समाज भी काफी परेशान है जिसके लोग वर्षों से खुले तेल का ही व्यापार करते आ रहे हैं। समाज ने सरकार से मांग की है कि इस तरह की सख्ती न करे बल्कि मिलावट करने वाली पर कार्रवाई करे। वहीं, कारोबारियों का भी तर्क है कि, खाद्य तेल की खरीदारी करने वाले हर ग्राहक की जरूरत और जेब एक जैसी नहीं होती। कोई परिवार महीने भर का तेल एक साथ खरीदता है तो कोई रोज की कमाई के हिसाब से 10, 20 या 30 रुपये का तेल लेकर घर चलाता है।

सरकार से राहत की मांग
कई लोगों का कहना है कि हम रोज कमाते हैं और रोज घर चलाते हैं। एक साथ 160-170 रुपये का तेल खरीदना हमारे लिए मुश्किल है। पहले जितनी जरूरत होती थी उतना ही तेल खरीद लेते थे। अब छोटी जरूरत के लिए भी पूरा पैकेट लेना पड़ रहा है। गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद्य तेल की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो लेकिन कार्रवाई के साथ गरीब उपभोक्ताओं की परेशानी का भी समाधान निकाला जाए।

लोगों का सुझाव है कि कम कीमत और छोटी मात्रा में मानक पैकिंग वाले खाद्य तेल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि नियमों का पालन भी हो और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े। खुले तेल की बिक्री पर सख्ती का उद्देश्य निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल उपलब्ध कराना है, लेकिन मौजूदा स्थिति में रोज कमाने-खाने वाले परिवारों के सामने खड़ी आर्थिक परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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