उड़ान डेस्क। ‘मिर्जापुर द मूवी’ के साथ कालीन भैया बनकर पंकज त्रिपाठी ने अब बड़े पर्दे पर जबरदस्त दस्तक दी है, लेकिन इस रुतबे के पीछे संघर्ष की एक अनकही कहानी है। बिहार के गांव से निकले पंकज कभी छात्र राजनीति के दौरान हफ्ते भर जेल में बंद रहे, जहां उन्होंने जिंदगी और इंसानों को गहराई से समझा। पंकज का सफर साबित करता है कि सच्चा हुनर एक न एक दिन अपना रास्ता बना ही लेता है।
एक नजर उनके सफरनामा पर।
‘कालीन भैया’ बनने का वो अनकहा दर्द
एक दौर वो भी था, जब पंकज अपने घर के उस खास कोने में फोन टिकाकर रखते थे जहां सबसे तेज नेटवर्क आता था, ताकि कोई कॉल छूट न जाए। वो कास्टिंग निर्देशकों और सहायक निर्देशकों के फोन का घंटों इंतजार करते, पर दिन बीत जाते थे और घंटी बजती ही नहीं थी।” नेटवर्क ढूंढते उस बेबस फोन और थमी हुई खामोशी के बीच ही सिनेमा के ‘कालीन भैया’ की नींव रखी जा रही थी।
ऐसे हुई पंकज त्रिपाठी के कलाकार बनने की शुरुआत
12वीं कक्षा में पंकज ने ‘अंधा कुआं’ नाटक देखा। अभिनेत्री प्रणीता जायसवाल के अभिनय ने उन्हें इस कदर झकझोरा कि उनकी आंखें भर आईं। यहीं से थिएटर का ऐसा बुख़ार चढ़ा कि 1994-95 के दौरान पंकज पटना में होने वाले हर नाटक को देखने के लिए साइकिल से निकल पड़ते थे। नाटक देखने का ये सिलसिला ऐसा परवान चढ़ा कि 1996 तक वे सिर्फ दर्शक बनकर नहीं रहे और खुद मंच पर उतरकर एक मंझे हुए कलाकार बन चुके थे।
न पिता से मदद, न जेब में पैसे
पंकज के लिए एक्टिंग का सफर आसान नहीं था। रात 11 से सुबह 7 बजे तक वे होटल की रसोई में नौकरी करते थे। इसके बाद सिर्फ 5 घंटे सोकर दोपहर 2 से शाम 7 बजे तक थिएटर की रिहर्सल करते। एक्टिंग की पढ़ाई के लिए पिता से पैसे मिलने की उम्मीद नहीं थी, इसलिए वो मुफ्त ट्रेनिंग की तलाश में जुटे। इसी दौरान उन्हें दिल्ली के NSD के बारे में पता चला, जहां दाखिले के लिए ग्रेजुएशन जरूरी था।
7 दिन जेल की बैरक में कटे
कॉलेज के दिनों में पंकज ABVP से जुड़े और एक छात्र आंदोलन के दौरान उन्हें 7 दिन जेल में रहना पड़ा, लेकिन जेल के वही 7 दिन उनकी जिंदगी बदलने वाले साबित हुए। वहां अकेले रहने के दौरान उन्हें खुद को समझने का मौका मिला। उन्होंने हिंदी साहित्य पढ़ना शुरू किया और महसूस किया कि वो दुनिया और किताबों से काफी अनजान थे। जेल के उस अनुभव उन्हें अंदर से पूरी तरह बदल गया और एक नई सोच दी।
‘सुल्तान’ से पहचान और ‘कालीन भैया’ से इतिहास
NSD से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पंकज फिल्मों में आए। तमाम छोटे-मोटे किरदारों के बाद फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के ‘सुल्तान’ से उन्हें पहली बड़ी पहचान मिली। इसके बाद वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ में उनके ‘कालीन भैया’ के किरदार ने इतिहास रच दिया और वो देश के सबसे पसंदीदा अभिनेताओं में शामिल हो गए।
इस तरह OTT पर तहलका मचाने वाला वही ‘कालीन भैया’ का रुतबा अब बड़े पर्दे की फिल्म के रूप में दर्शकों का दिल जीतने लौट आया है।

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