उड़ान डेस्क। कच्चे तेल की कीमत 9 सितंबर 2026 को $100 प्रति बैरल पर पहुंच चुकी है। यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और बढ़ते हमलों का नतीजा है। जिसके कारण तेल सप्लाई बाधित है। Goldman Sachs पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल पर जा सकती है।
क्रूड ऑयल की कीमतों ने आज यानी 9 सितंबर 2026 दिन बुधवार को ग्लोबल मार्केट में लंबी छलांग लगाई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्लोबल तेल सप्लाई बाधित पड़ी हुई है। इन सब का असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के रूप में दिख रहा है। आज ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल पर आ चुकी है। वहीं WTI क्रूड का भाव $94 प्रति बैरल के पार निकल चुका है। बैंकिंग और इन्वेस्टमेंट फर्म Goldman Sachs पहले ही कच्चे तेल की कीमतों का 120 डॉलर पर जाने की चेतावनी दे चुके हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर
- अमेरिका की सेना ने ईरान के तेल टैंकरों पर फिर हमला किया। वहीं ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी ड्रोन को अपने कब्जे में ले लिया है।
- अमेरिका ने ईरान की 36 संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है।
इन संस्थानों में विदेशी कार्गो सर्विस वाली कंपनियों और एयरलाइंस भी है। - अमेरिका का कहना है कि वह ईरान के सभी व्यापारिक साझेदारों को अलग करना चाहता है और ईरान को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है।
- अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने उन देशों के खिलाफ भी चेतावनी जारी की है जो ईरान के साथ व्यापारिक साझेदार हैं।
- अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसा करने वाले देशों को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से निकाला जा सकता है।
- अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि इससे अमेरिका की छवि भी खराब हो रही है।
एक्सपर्ट की चेतावनी
बैंकिंग और इन्वेस्टमेंट फर्म Goldman Sachs पहले यह चेतावनी दे चुके हैं कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच हालात सामान्य नहीं होते हैं। होर्मुज में जहाजों पर लगातार हमले होते हैं और सप्लाई बाधित होती है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि सप्लाई संकट बढ़ने से तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल पर जा सकती है।
भारत की बढ़ती टेंशन
तेल की कीमतों में आई तेजी भारत के आयात बिल को बढ़ा रही है। यदि ऐसा लंबे समय तक जारी रहा तो इसका असर पेट्रोल डीजल की कीमतों में इजाफे के रूप में भी देखने को मिल सकता है। जिससे महंगाई भी बढ़ सकती है।

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