September 14, 2026

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जो अकलियत पर जुल्म करते हैं, उनकी सरकार का पतन करीब होता है: काजी-ए-शहर


• ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक, मप्र भी शामिल होगा दिल्ली प्रदर्शन में

भोपाल। इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि जो भी सरकार अकलियतों (अल्पसंख्यकों) पर जोर, जुल्म, ज्यादती, दमन करता है, उसका पतन निकट होता है। यूसीसी के नाम पर जो नया कानून थोपा जा रहा है, उससे समाज के कई वर्ग प्रभावित होंगे। जिस कानून की पैरवी आज की जा रही है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोवलकर ने भी विरोध करते हुए इसको समाज की अवधारणा के खिलाफ बताया था।

शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने यह बात सोमवार को पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर विधायक आरिफ मसूद, मौलाना मिस्बाह साहब, मौलाना तकी साहब आदि भी इस दौरान मौजूद थे। पर्सनल लॉ बोर्ड की मप्र इकाई की बैठक के बाद विधायक मसूद ने कहा कि यूसीसी कानून स्वीकार नहीं किया जाएगा, इस बात का अधिकार उन्हें संविधान ने दिया है, हर व्यक्ति को अपने विवेक अनुसार कोई भी धर्म और उसकी व्यवस्थाएं मानने की आजादी है। इसका जिक्र संविधान के अनुच्छेद 29 में भी मौजूद है। मसूद ने बताया कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा 17 सितम्बर को दिल्ली के जंतर मंतर पर किए जाने वाले प्रदर्शन में मप्र से भी लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में इस मामले को लेकर लीगल टीम काम कर रही हैं। इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि यूसीसी मामले में जिस तरह ट्राइबल को अलग रखा गया है, वैसे ही मुस्लिम समाज को इस्लामी मान्यताओं का पालन करने की अनुमति न्यायालय से मिलेगी।

शहर काजी ने कहा
शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी और मुस्लिम संगठनों ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल को वापस लेने या मुसलमानों को इसके दायरे से बाहर रखने की मांग की है।
• यूसीसी के खिलाफ सड़कों पर उतरने के बजाय कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, जिसके लिए वरिष्ठ वकीलों का एक पैनल तैयार किया गया है।
• शहर काजी ने तर्क दिया है कि यदि आदिवासी समुदायों और कुछ अन्य विशेष समूहों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है, तो उसी आधार पर मुस्लिम समुदाय को भी इससे छूट दी जानी चाहिए।

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