September 14, 2026

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मायने नहीं रखता लड़की होना, जिया ने 80 लड़कों की साइकिल रैली में बनाया मुकाम

उत्साह के पैडल, खुशियों की रफ्तार, कामयाबी की मंज़िल…

भोपाल। नाम मिन्हा… मिन्हा जिया…! उम्र के उस 11वें पड़ाव पर हैं, जहां छुईमुई-सी बनकर घर के किसी कोने में बैठा दी गई होती…! स्कूल, मदरसा, घर और घरेलू कामकाज ही उसका नसीब बन चुके होते…! लेकिन जज्बा लड़कों को हर क्षेत्र में आगे रखे जाने वाले समाज में जिया ने एक अलग ही संदेश दिया…! कोई क्षेत्र, किसी एक वर्ग की बपौती नहीं…! लड़कियां भी किसी से कुछ कम नहीं…!

शहर के आरिफ नगर क्षेत्र में उत्साह की एक साइकिल रैली का आयोजन किया गया। करीब 80 लड़कों की सहभागिता वाले इस कार्यक्रम को मिस्बाह ने आकार दिया। लंबी दौड़ लगी और कामयाबी की मंज़िल तक पहुंची तो मिन्हा जिया भी इसकी गोल्ड मेडलिस्ट में शामिल थीं। इस दौड़ में मिस्बाह, तकी, ताहा, मूसा के हाथ भी अवॉर्ड से भरे थे।

आश्चर्य और प्रशंसाओं से भरे मजमे में जब पुरस्कार वितरण किया गया तो जिया को खास तौर पर रेखांकित किया गया। जाहिर किया गया कि समाज में लड़कियां भी किसी दौड़ में न कमजोर हैं और न ही किसी से पीछे।

अगली दौड़ मड रैली की तर्ज पर
विधायक आतिफ अकील फैंस क्लब के युवाओं द्वारा बच्चों की इस आयोजन को बैक सपोर्ट और बल दिया गया था। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने इस रैली के सेकंड राउंड की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगला राउंड मड रैली की तर्ज पर आयोजित किया जाएगा।

जिया के शौक निराले
ग्यारहवें वर्ष में पहुंच चुकी जिया का पहनावा, दोस्ती और हावभाव अब भी लड़कों के समान हैं। उनकी दुपट्टा ओढ़ी सहेलियां न होकर चाय दुकान पर चुस्कियां लेते दोस्त हैं। हॉकी और फुटबॉल मैदान उसका साथी है। स्केट्स के सहारे दौड़ लगाना उसका मिज़ाज है। पापा शाहिद और अम्मा वसीम बानो चिंतित और फिक्रमंद भी हैं। फूफ्फो हुमैरा और भाई दानिश और बहन मंशा इस कंफ्यूजन में रहते हैं कि तेज रफ्तार से बढ़ती जिया के कदम रोके जाएं या इन्हें रफ्तार दी जाए।

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