June 25, 2026

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कांग्रेस का केंद्र पर बड़ा हमला : देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक है निवेश का “मोदानी मॉडल”

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को दावा किया कि भारत की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक निजी कॉरपोरेट निवेश में भारी सुस्ती है। पार्टी का कहना है कि आर्थिक शक्ति का बढ़ता केंद्रीकरण न सिर्फ प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहा है, बल्कि व्यापक निजी निवेश की संभावनाओं को भी सीमित कर रहा है।

कांग्रेस पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल निजी पूंजीगत निवेश (Private Capital Expenditure) का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेले अडानी समूह द्वारा किया गया है। जयराम ने इसे आर्थिक शक्ति के बढ़ते केंद्रीकरण का संकेत बताया।

जयराम रमेश ने कहा कि निजी कॉरपोरेट निवेश में अपेक्षित तेजी न आना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार, इसके पीछे कई वजहें हैं, जिनमें वास्तविक मजदूरी (Real Wages) में ठहराव प्रमुख है। इसका असर विभिन्न आय वर्गों में उपभोग (Consumption) की वृद्धि पर भी पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण घरेलू बचत दर (Domestic Savings Rate) में आई गिरावट ने निवेश के लिए उपलब्ध संसाधनों को प्रभावित किया है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि निजी निवेश में सुस्ती का एक बड़ी वजह ऐसा माहौल भी है, जहां कारोबारी समुदाय सरकारी एजेंसियों के दबाव और कार्रवाई के डर से निवेश संबंधी फैसले लेने में हिचकिचाता है। रमेश ने कहा कि कर विभाग, जांच एजेंसियों और अन्य सरकारी संस्थाओं के जरिए पैदा हुआ कथित “रेड राज” (Raid Raj), नीतियों में निरंतरता और पारदर्शिता की कमी तथा निवेश संबंधी निर्णयों में अनिश्चितता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।

इसके अलावा उन्होंने चीनी आयातों में बढ़ोतरी को भी घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के लिए चुनौती बताया। उनके अनुसार, सस्ते आयातों ने भारतीय निर्माताओं के बाजार हिस्से पर दबाव डाला है। जयराम रमेश ने कहा कि अर्थव्यवस्था में आर्थिक शक्ति का तेजी से कुछ बड़े कॉरपोरेट समूहों के हाथों में सिमटना निवेश वृद्धि के लिए बाधा बन सकता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस कारोबारी समूह को वह “मोदानी साम्राज्य” (Modi-Adani Nexus) कहते हैं, उसके प्रमुखों ने स्वयं यह दावा किया है कि 2025-26 में भारत के कुल निजी कॉरपोरेट निवेModi-Adani Nexusश का एक-तिहाई हिस्सा उनके समूह से आया। आमतौर पर अर्थशास्त्र में यह बहस होती रही है कि कहीं सरकारी निवेश (Public Investment) निजी निवेश को पीछे तो नहीं धकेल रहा। लेकिन कांग्रेस का दावा है कि अब एक नई स्थिति सामने आ रही है।

रमेश ने आरोप लगाया कि “राजनीतिक संरक्षण प्राप्त निजी निवेश” ही अब व्यापक निजी निवेश के लिए जगह कम कर रहा है। उनका कहना है कि जब कुछ चुनिंदा समूहों को असमान रूप से अधिक अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो अन्य निवेशकों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है।

कांग्रेस के इस बयान से एक बार फिर देश में कॉरपोरेट निवेश, आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण और सरकार-कारोबार संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि केंद्र सरकार कुछ बड़े उद्योग समूहों को बढ़ावा दे रही है, जबकि सरकार इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी कहकर खारिज करती रही है।

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