उड़ान डेस्क। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Dixon Technologies और चीन की स्मार्टफोन कंपनी Vivo की भारतीय इकाई Vivo Mobile India अब मिलकर भारत में स्मार्टफोन बनाएंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों कंपनियों के जॉइंट वेंचर (JV) को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। Dixon Technologies ने गुरुवार देर रात शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी। दोनों कंपनियों ने इस साझेदारी के लिए दिसंबर 2024 में समझौता किया था। अब सरकार की मंजूरी मिलने के बाद यह जॉइंट वेंचर आगे बढ़ सकेगा।
कैसे होगी साझेदारी?
नई कंपनी में Dixon Technologies की 51% हिस्सेदारी होगी, जबकि Vivo Mobile India के पास 49% हिस्सेदारी रहेगी। यानी नई कंपनी का कंट्रोल Dixon के पास होगा। यह जॉइंट वेंचर सिर्फ Vivo के लिए ही स्मार्टफोन नहीं बनाएगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड्स के लिए भी मैन्युफैक्चरिंग कर सकेगा।
सरकार की मंजूरी क्यों जरूरी थी?
Vivo चीन की कंपनी है। भारत में चीन जैसे पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर प्रेस नोट-3 के तहत सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। इसी नियम के तहत इस जॉइंट वेंचर को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने इस साल मार्च में इन नियमों में कुछ बदलाव किए थे। नए नियमों के मुताबिक, कुछ मामलों में 10% तक गैर-नियंत्रण हिस्सेदारी (Non-controlling stake) के लिए राहत दी गई है, लेकिन इस तरह के जॉइंट वेंचर के लिए सरकारी मंजूरी अभी भी जरूरी है।
Dixon को क्या होगा फायदा?
Dixon का कहना है कि इस साझेदारी से उसकी स्मार्टफोन बनाने की क्षमता और मजबूत होगी। कंपनी को उम्मीद है कि इससे भारत के एंड्रॉयड स्मार्टफोन बाजार में उसकी पकड़ और बढ़ेगी। साथ ही कंपनी को ज्यादा ऑर्डर मिलने और कारोबार बढ़ने की भी उम्मीद है।

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