- रोज आते हैं प्रस्ताव, दौड़ जाती है फाइल
खान अशु, भोपाल। लोकसभा, विधानसभा, नगरीय निकाय या पंचायतों के चुनाव का एक निर्धारित समय है, जिसके लिहाज से यहां की चयन प्रक्रिया आकार लेती है। लेकिन प्रदेश का एक विभाग ऐसा भी है, जहां हर दिन कोई न कोई चुनाव आकार लेता दिखाई देता है। प्रदेशभर में समितियों की बड़ी तादाद इसकी वजह है।
नजारा प्रदेश के सहकारिता विभाग का है। जहां चुनावी मौसम हर रोज मंडराने के हालात बनते हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस समय प्रदेशभर में करीब 54000 सहकारी समितियां काम कर रही हैं। दुग्ध, सब्जी, खाद, गृह निर्माण, राशन समेत कई बातों से जुड़ी इन समितियों में से करीब आधी ऐसी हैं, जिनपर चुनावी प्रक्रिया लागू है। जबकि खाद, बीज आदि से जुड़ी करीब 5 हजार समितियाँ इस समय निष्क्रिय हैं।
इधर प्रस्ताव, उधर चुनाव
विभाग की कार्यप्रणाली इस तरह तैयार की गई है कि किसी भी सहकारिता समय की निर्धारित अवधि पूर्ण होने से पहले ही उसकी चुनावी प्रक्रिया शुरु कर दी जाती है। किसी भी समिति से चुनाव प्रस्ताव मिलते ही विभाग अपने काम में जुट जाता है। सदस्य सूची, चुनाव तिथि, निर्वाचन अधिकारी और चुनाव पश्चात चुनी गई समिति को अधिकार देने की भूमिका वे निभाते हैं। कार्य की द्रुत गति का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि दफ्तर में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की टेबल पर किसी लंबित फाइल का निशान दिखाई नहीं देता है। आज का काम आज ही, की तर्ज पर इस दफ्तर में काम किया जा रहा है।
पारदर्शिता प्रथम
विभाग के बड़े से लेकर छोटे अधिकारी तक और निचले स्तर के क्लेरिकल स्टॉफ तक सतत कैमरे की निगरानी में बने हुए हैं। जहां उच्च अधिकारी अपने मातहतों पर निगरानी रखते हैं, वहीं बड़े अफसरों पर भी नजर बनी रहे, यह व्यवस्था इस कार्यालय में बनाई गई है।
सबका सहयोग, सबको आदर
सतपुड़ा भवन के एक फ्लोर पर स्थित इस सहकारिता निर्वाचन विभाग में हर आगंतुक को आत्मीय व्यवहार मिलता है। यहाँ आने वाले किसी भी जिज्ञासु या याचक को उसके प्रश्न का मुनासिब जवाब देने के लिए हर स्तर के अधिकारी मौजूद हैं। आने वाले हर व्यक्ति को संतुष्टि के साथ वापस भेजने की परम्परा सहकारिता विभाग के इस कार्यालय ने तय कर रखी है।

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