नईदिल्ली. सैलरीड क्लास के लिए प्रॉविडेंट फंड बहुत बड़ा सपोर्ट होता है. ये रिटायरमेंट फंड के तौर पर काम करता है. अभी तक मिनिमम 15 हजार की सैलरी होने पर PF अकाउंट खोला जाता है. लेकिन, अब कंपनियों को 25 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को PF के दायरे में शामिल करना ही होगा. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (16 सितंबर) को एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड (EPF) और एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) के लिए अनिवार्य बेसिक सैलरी की लिमिट 15000 से बढ़ाकर 25000 प्रति महीना कर दी है. पूरे 12 साल बाद लिमिट में बदलाव हुआ है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि इससे 51 लाख एम्प्लॉयी को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा. पहले बिना सैलरी कटे कर्मचारी के हाथ में पूरी सैलरी मिल जाती थी, लेकिन 25 हजार रुपये की लिमिट होने के बाद PF कटने से कर्मचारी की सेविंग बढ़ेगी. इससे रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए बड़ा फंड बनेगा. सरकार इस बदलाव पर करीब 11,339 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा एम्प्लॉयी को EPF जैसी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के दायरे में लाना है.
एम्प्लॉयी की टेक होम सैलरी पर क्या असर होगा?
इस बदलाव का एक अहम पहलू एम्प्लॉयी की टेक-होम सैलरी है. EPF में एम्प्लॉयी और एम्प्लॉयर दोनों की ओर से कॉन्ट्रिब्यूशन होता है. एम्प्लॉयी के मामले में PF में कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़ने से उनकी हाथ में आने वाली सैलरी और भविष्य में जमा होने वाली रकम दोनों पर असर पड़ सकता है. यानी हर महीने टेक होम सैलरी में कुछ रकम कम हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ PF अकाउंट में ज्यादा रकम जमा होने से रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स बढ़ सकती है.

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