Famous Devi Temples in india : वैसे तो सभी दिन मां दुर्गा की पूजा के लिए विशेष हैं, लेकिन मां दुर्गा की भक्ति और आराधना के लिए नवरात्रि का विशेष महत्व है। भारत में शक्ति के कई जागृत और प्रसिद्ध देवी मंदिर हैं, जहाँ वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्रि में इन मंदिरों में विशेष पूजा—अर्चना का दौर सुबह से ही शुरु हो जाता है। बात चैत्र नवरात्रि की या फिर शारदीय नवरात्रि की, हर कोई मां के दरबार में जाकर भक्ति में लीन होना चाहता है। हम यहां देश के 15 प्रसिद्ध देवी मंदिरों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जहां पहुंचकर आप देवी मां की सच्ची आराधना—भक्ति कर अपनी हर मनोकमना पूरी कर सकते हैं।
1. वैष्णो देवी, जम्मू-कश्मीर

त्रिकूट पर्वत पर स्थित यह मंदिर भारत के सबसे लोकप्रिय तीर्थस्थलों में से एक है। वैष्णो देवी मंदिर जो सालों से भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां पर दिव्य शक्तियों के बीच मां के प्रति भक्तों की अगाध श्रद्धा आपके रोम-रोम में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर देगी। भवन में मां वैष्णों के दर्शन के बाद भैरव जी के दर्शन की भी मान्यता है। कहा जाता है बिना भैरव जी के दर्शन के आपकी यह दिव्य यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है।
वैष्णो देवी के दरबार में जाने मात्र से भक्तों की सभी चिंताएं दूर हो जाती है जहां के चढ़ाई वाले रास्तों पर माता के जयकारों की गूंज आपको थकान का अहसास नहीं होने देगी और जगह-जगह पर मां का प्रसाद रूपी लंगर आपकी आत्मा को तृप्त कर देगा। इस तृप्ति के बीच भवन में पहुंच कर मां के तीन रूप महासरस्वती, महाकाली तथा महालक्ष्मी के दर्शन से आपके मन में अपार भक्ति और दिव्य अनुभव का का आभास होगा।
वैष्णो देवी मंदिर के पास घूमने की जगह
वैष्णो देवी मंदिर, पटनी टॉप, डोगरा आर्ट म्यूजियम, रघुनाथ मंदिर, बाग-ए-बहु, शिव खोरी, मुबारक मंडी हेरिटेज कॉम्प्लेक्स तथा श्री रणवीरेश्वर मंदिर आदि जम्मू के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं जहां आप वैष्णो देवी मंदिर के साथ में प्लान कर सकते हैं।
2. कामाख्या मंदिर, असम

गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित, यह तांत्रिक शक्तिपीठों में सर्वोत्तम माना जाता है। कामाख्या मंदिर, देवी सती को समर्पित 51 शक्तिपीठों में से एक है जहां पर मंदिर के गर्भगृह में किसी मूर्ति की नहीं अपितु माता की योनि की पूजा की जाती है। नीलांचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां 3 बार दर्शन करने से संसार के सभी बंधनों से मुक्ति मिलती है।
कामाख्या मंदिर में भक्तों का तांता हर समय लगा रहता है, अंबुबाची मेले के दौरान यहां श्रद्धालुओं का सैलाब रहता है। इस प्रसिद्ध मंदिर में देश से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु मां कामाख्या के दर्शन करने के लिए आते हैं।
कामाख्या मंदिर के पास घूमने की जगह
कामाख्या मंदिर, नेहरू पार्क, चंदूबी झील, असम स्टेट जू कम बोटैनिकल गार्डन, वशिष्ठ आश्रम मंदिर, फैन्सी बाजार, श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र, हाजो, नवग्रह मंदिर, क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र, पूर्व तिरुपति श्री बालाजी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य, असम स्टेट म्यूजियम, गुवाहाटी तारामंडल, भुवनेश्वरी मंदिर तथा श्री उमानंद मंदिर आदि गुवाहाटी के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।
3. ज्वाला देवी, हिमाचल प्रदेश

कांगड़ा में स्थित ज्वाला देवी मंदिर, यहां माता साक्षात ज्योति के रूप में विराजमान हैं। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में स्थित ज्वाला देवी मंदिर, भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है और अपनी अद्भुत और रहस्यमयी शक्तियों के कारण भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां दूर-दूर से सैंकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। शिवालिक पर्वतमाला पर बसा ज्वाला देवी मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां माता सती की जीभ गिरी थी जिसका प्रतिनिधित्व पवित्र ज्वाला के द्वारा किया जाता है जो हमेशा जलती रहती है। इस भव्य मंदिर में पहुंचकर आप मां की शक्तियों के अलौकिक अनुभव करेंगे।
ज्वाला देवी मंदिर के पास घूमने की जगह
मसरूर मंदिर, करेरी झील, कांगड़ा किला, मक्लोडगंज, डल झील, पालमपुर चाय बागान, ज्वाला देवी मंदिर, पोंग डैम, चिन्मय तपोवन, बीर बिलिंग, त्रियुंड, बगलामुखी मंदिर, इंद्रहार दर्रा, महाराणा प्रताप सागर, भागसु नाग मंदिर, कुणाल पथरी, चामुंडा देवी मंदिर, बृजेश्वरी मंदिर तथा बैजनाथ मंदिर आदि कांगड़ा के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।
4. करणी माता मंदिर, राजस्थान

बीकानेर (देशनोक) में स्थित, यह चूहों के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। करणी माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर बीकानेर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यह मंदिर करणी माता को समर्पित है, जिन्हें स्थानीय लोग हिंदू धर्म की रक्षक देवी दुर्गा का अवतार मानते हैं। करणी माता चौदहवीं शताब्दी में रहने वाली चारण जाति की एक हिंदू योद्धा संत थीं। तपस्वी जीवन व्यतीत करते हुए, करणी माता को स्थानीय लोगों द्वारा अत्यधिक सम्मान दिया जाता था और उनके कई अनुयायी भी थे। जोधपुर और बीकानेर के महाराजाओं के अनुरोध पर, उन्होंने मेहरानगढ़ और बीकानेर किलों की नींव भी रखी थी। हालांकि उनके कई मंदिर हैं, लेकिन बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर स्थित देशनोक कस्बे में स्थित यह मंदिर सबसे अधिक प्रसिद्ध है।
इस मंदिर के बारे में खास मान्यता
बीकानेर का करणी माता मंदिर अपनी भौगोलिक स्थिति या वास्तुकला के लिए नहीं, बल्कि 25,000 से अधिक चूहों के निवास के लिए प्रसिद्ध है, जो मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमते-फिरते हैं। ये जीव दीवारों और फर्श की दरारों से निकलते हुए अक्सर आगंतुकों और भक्तों के पैरों के ऊपर से गुजरते हुए देखे जा सकते हैं। इन चूहों द्वारा कुतरे गए खाद्य पदार्थों का सेवन करना यहाँ एक पवित्र प्रथा माना जाता है। भारत और विदेशों के विभिन्न कोनों से लोग इस अद्भुत दृश्य को देखने आते हैं और इन पवित्र प्राणियों के लिए दूध, मिठाई और अन्य प्रसाद भी लाते हैं।
5. महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर देवी के प्रमुख 51 शक्तिपीठों में से एक है और भक्तों की आस्था का केंद्र है। महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण चालुक्य साम्राज्य के राजा कर्णदेव के द्वारा 700 ई. में करवाया गया था। अम्बाबाई मंदिर के नाम से मशहूर महालक्ष्मी मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां दर्शन करने वाले भक्त अपने मन की इच्छा पूरी भी कर सकते हैं और अपनी इच्छाओं से मुक्ति भी पा सकते हैं। अत्यंत सुंदर नक्काशी से सजे हुए उत्कृष्ट वास्तुकला के उदाहरण वाले महालक्ष्मी मंदिर परिसर में नवग्रह मंदिर, शेषशाही मंदिर तथा गणपती मंदिर भी हैं।
महालक्ष्मी मंदिर के पास घूमने की जगह
अम्बाबाई मंदिर, नूरसिंहवाड़ी मंदिर, बालुमामा मंदिर, पन्हाला किला, ज्योतिबा मंदिर, विशालगढ़ दरगाह, येलवन जुगाई, ऑल सेंट चर्च, रंकाला झील, भवानी मंडप, सिद्धगिरी संग्रहालय, रामतीर्थ वॉटरफॉल, पोहले गुफ़ाएं, टाउन हॉल, राधानगरी बांध, न्यू पैलेस, विनखांबी गणेश मंदिर, कोपेश्वर मंदिर, गगनबावड़ा तथा दाजीपुर वन्यजीव अभयारण्य आदि कोल्हापुर के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।
6. कालीघाट काली मंदिर, पश्चिम बंगाल

कोलकाता स्थित यह मंदिर अत्यंत जागृत शक्तिपीठ माना जाता है। देवी मां काली को समर्पित दक्षिणेश्वर काली मंदिर, दक्षिणेश्वर, कोलकाता में स्थित है जिसकी स्थापना एक बहादुर, देवी काली की भक्त और विदेशी शासन की विद्रोही महिला रानी रश्मोनी ने एक स्वप्न के बाद की थी। मंदिर परिसर में देवी काली के मंदिर के अलावा अन्य देवी देवताओं को समर्पित मंदिर भी है जिनमें 12 शिव मंदिर हैं जो 12 ज्योतिर्लिंगों को ध्यान में रखते हुए स्थापित किए गए थे और विष्णु मंदिर भी है जिसमें राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं विराजमान हैं। उत्कृष्ट वास्तुकला से सुसज्जित दक्षिणेश्वर काली मंदिर, शांति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम है जिसके कारण इसे भारत के 10 प्रसिद्ध देवी मंदिर की श्रेणी में रखा गया है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पास घूमने की जगह
काली घाट मंदिर, बेलूर मठ, बिरला मंदिर, हावड़ा ब्रिज, विक्टोरिया मेमोरियल म्यूजियम, साइंस सिटी, न्यू मार्केट, सेंट पॉल कैथेड्रल, इको पार्क, इंडियन म्यूजियम, मार्बल पैलेस, फोर्ट विलियम, जूलॉजिकल गार्डन, प्रिंसेप घाट, नखोदा मस्जिद, पार्क स्ट्रीट तथा जोरासांको ठाकुरबाड़ी आदि प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।
7. नैना देवी मंदिर, उत्तराखंड

नैनीताल में नैनी झील के पास, यह सती के नेत्र गिरने वाला स्थान माना जाता है। हिमाचल प्रदेश राज्य के बिलासपुर जिले में पहाड़ी पर स्थित श्री नैना देवी मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का सैलाब रहता है। ऐसी मान्यता है कि, यहां श्री नैना देवी जी की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी जो पिंडी रूप में है। जय माता दी का नारा लगाते हुए भक्त, मां नैना देवी के दर्शन के लिए पैदल ही पहाड़ की चोटी तक पहुंचते हैं। हालांकि, यहां भक्तों के लिए पालकी और रोपवे की सुविधा भी है। मान्यता है कि भगवान विष्णु द्वारा चलाए गए सुदर्शन चक्र से कटे देवी सती के अंगों में से उनकी आँख यहाँ गिरी थी जिसकी वजह से इस स्थान को नैना देवी कहा गया।
नैना देवी मंदिर के पास घूमने की जगह
गोविंद सागर झील, बाबा बालक नाथ मंदिर, रुक्मणी कुंड, भाखड़ा बांध, कंदरौर ब्रिज, बछरेटू किला, लक्ष्मी नारायण मंदिर तथा व्यास गुफा आदि नैना देवी मंदिर के आस-पास के प्रमुख आकर्षण हैं।
8. कैला देवी मंदिर, चामुंडा देवी

राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक कैला देवी मंदिर, करौली जिले के कैलादेवी गांव में स्थित है। मंदिर के प्रमुख स्थान में श्री कैला देवी और चामुंडा देवी की मूर्ति एक साथ विराजमान है। स्कन्द पुराण के अनुसार, कैलादेवी उसी महामाया का एक रूप हैं जिन्होंने नंद बाबा और यशोदा मैया की संतान के रूप में जन्म लिया था और जब उन्हें कंस ने कृष्ण समझकर मारने की कोशिश की तब उन्होंने कंस को अपना दिव्य देवी रूप दिखाया और इस बात से अवगत कराया कि कृष्ण पहले ही जन्म ले चुके हैं। कैला देवी या करौली मैया के बारे में मान्यता है कि यहां दर्शन करने मात्र से सभी मन की कामनाएं पूरी होती हैं।
इसके अलावा चामुंडी पहाड़ियां, मैसूर में यहां चामुंडेश्वरी देवी का भव्य मंदिर है। जहां भी भक्तों का तांता लगा रहता है।
कैला देवी मंदिर के पास घूमने की जगह
श्री मदन मोहन जी मंदिर, कैलादेवी अभयारण्य, सिटी पैलेस, भंवर विलास पैलेस, श्री महावीरजी जैन मंदिर, मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, तिमनगढ़ किला तथा कल्याण जी मंदिर आदि कैलादेवी के पास के प्रमुख आकर्षण हैं।
9. शीतला देवी मंदिर, गुड़गांव

मान्यता प्राप्त जागृत मंदिर। गुरुग्राम का शीतला माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था का ऐसा केंद्र है जहां माता शीतला को कई समाजों जैसे ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, जाट और गुर्जर समुदाय में कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। यही कारण है कि यह मंदिर, नवरात्र हो या कोई और विशेष अवसर, हमेशा भक्तों से भरा रहता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर लगे बरगद के पेड़ से जुड़ी एक विशेष परंपरा है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए इस पेड़ पर चुन्नी या मौली बांधते हैं और माता को जल अर्पित कर आशीर्वाद मांगते हैं। विशेष रूप से महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए माता की पूजा करती हैं। यहां लाल रंग का दुपट्टा और मुरमुरे प्रसाद के रूप में चढ़ाने की परंपरा भी है।
महाभारत काल से जुड़ी मान्यता
इतिहास की बात करें तो इस मंदिर की जड़ें महाभारत काल तक जाती हैं। मान्यता है कि यहीं द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को शिक्षा दी थी। स्कंद पुराण में भी शीतला माता का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने माता शीतला को संसार को निरोग रखने का कार्य सौंपा था, इसलिए भक्त मानते हैं कि उनकी पूजा करने से रोग और कष्ट दूर हो जाते हैं।
10. पावागढ़, गुजरात

पंचमहल जिले के पावागढ़ के शिखर पर विराजमान मां कालिका देवी जिनके दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। गुजरात के वडोदरा से 46 किलोमीटर (लगभग) की दूरी पर स्थित पावागढ़ मंदिर के बारे में मान्यता है कि महर्षि श्री विश्वामित्र ने मां कालिका देवी को इस पहाड़ की चोटी पर स्थापित किया था जिसके कारण यह एक पूजनीय स्थल बन गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार यहां देवी सती के दाहिने पैर के अंगूठा गिरा था जिसके कारण इसे शक्तिपीठ भी माना जाता है।
पावागढ़ के पास घूमने की जगह
अंबिका निकेतन/अंबाजी मंदिर (ताप्ती नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध मंदिर), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, चंपानेर, खेड़ा, लक्ष्मी विलास पैलेस, जम्बुघोडा वन्यजीव अभयारण्य तथा नवलखा कोठार आदि पावागढ़ के पास में घूमने की जगह हैं।
11. देवी दन्तेश्वरी मंदिर: छत्तीसगढ़

देवी दन्तेश्वरी को समर्पित दन्तेश्वरी मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और दन्तेवाड़ा, छत्तीसगढ़ में स्थित है। नवरात्रि और फागुनमेला के दौरान यहां पर कई सारे पारंपरिक उत्सव मनाए जाते हैं जिस कारण इस समय यहाँ पर सबसे ज्यादा भक्तों की भीड़ लगती है। दन्तेश्वरी मंदिर का निर्माण बस्तर के छिंदक नागवंशी शासकों द्वारा करवाया गया था। मंदिर की मुख्य छवि छह भुजाओं वाली माँ महिषासुरमर्दिनी हैं। मान्यता है कि देवी सती का दांत यहां गिरा था जिसके कारण यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है।
मां दन्तेश्वरी मंदिर के पास घूमने की जगह
ढोलकल गणेश, गुमेर वॉटरफॉल, नागफनी, समलूर शिव मंदिर, झारालावा वॉटरफॉल, मामा-भांजा मंदिर, तपेश्वरी मंदिर, बोधघाट साठधारा, फुलपाड़ वॉटरफॉल, बारसुर, गामावाडा के स्मृति स्तम्भ, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान तथा बचेली आदि प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।
12. प्रसिद्ध धाम मां पीतांबरा देवी : मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा सिद्धपीठ है। इसकी स्थापना 1935 में स्वामीजी ने की थी। यहां मां के दर्शन के लिए कोई दरबार नहीं सजाया जाता बल्कि एक छोटी सी खिड़की है, जिससे मां के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। यहां मां पीतांबरा देवी तीन प्रहर में अलग-अलग स्वरूप धारण करती हैं। यदि किसी भक्त ने सुबह मां के किसी स्वरूप के दर्शन किए हैं तो दूसरे प्रहर में उसे दूसरे रूप के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। मां के बदलते स्वरूप का राज आज तक किसी को नहीं पता चल सका। इस इसे चमत्कार ही माना जाता है। यूं तो हर समय ही यहां भक्तों का मेला सा लगा रहता है लेकिन नवरात्र में मां की पूजा का विशेष फल बताया गया है। कहा जाता है कि पीले वस्त्र धारण करके, मां को पीले वस्त्र और पीला भोग अर्पण करने से भक्त की हर मुराद यहां पूरी होती है।
13. अद्भुत रहस्यमयी मां त्रिपुर सुंदरी : बिहार

बिहार के बक्सर में तकरीबन 400 साल पहले ‘मां त्रिपुर सुदंरी’ मंदिर का निर्माण हुआ था। कहा जाता है कि इसका निर्माण तांत्रिक भवानी मिश्र ने किया था। यहां मंदिर में प्रवेश करते हैं अद्भुत शक्ति का आभास होता है। साथ ही मध्य रात्रि में मंदिर परिसर से आवाजें आनी शुरू हो जाती हैं। पुजारी बताते हैं कि यह आवाजें मां की प्रतिमाओं के आपस में बात करने से आती हैं। हालांकि इस मंदिर से आने वाली आवाजों पर पुरातत्व विज्ञानियों ने कई बार शोध भी किया गया लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिल सका। इसके बाद यह शोध भी बंद कर दिए गए। वासंतिक हो या शारदीय यहां साधकों की भीड़ रहती है।
14. श्रीसंगी कालिका मंदिर : कर्नाटक

यह मंदिर कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है। इस मंदिर की स्थापना के बारे में कहा जाता है कि इसकी स्थापना प्रथम शताब्दी में की गई थी। मां के इस मंदिर में काली के स्वरूप की उपासना की जाती है। कहा जाता है कि मां के इस दरबार से कभी भी कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटा। यहां वासंतिक और शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ होती है।
15. मां शारदा मंदिर: मैहर, मध्यप्रदेश

पवित्र मा शारदा मंदिर मध्य प्रदेश के मैहर जिले के ग्राम मैहर में स्थित है। यह मंदिर लगभग 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो बहुत ही दिव्य और आलौकिक माना जाता है। ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को समर्पित यह मंदिर शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि अल्हा और उदल इस दूरस्थ जंगल में देवी के दर्शन करने वाले पहले व्यक्ति थे। अल्हा ने श्रद्धापूर्वक देवी को ‘शारदा माई’ कहकर पुकारा, जो बाद में ‘माता शारदा माई’ के नाम से लोकप्रिय हो गया। ऐसा माना जाता है कि आज भी सुबह के समय आल्हा देवी शारदा की पूजा करने के लिए मंदिर आते हैं।
मैहर मंदिर में मां सती का हार गिरा था, जिसकी वजह से इस जगह का नाम ‘माई का हार’ पड़ गया. बाद में अपभ्रंश होकर इसका नाम मैहर हो गया. मैहर मंदिर के बारे में एक और कहानी है कि जब भगवान शिव मृत माता सती के शरीर को ले जा रहे थे, तब उनका हार इस जगह पर गिरा था और इसलिए इसका नाम “मैहर” पड़ा (मैहर = माई + हर , जिसका अर्थ है “मां का हार”)। मैहर में मां शारदा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए त्रिकुट पर्वत पर मुख्य रूप से 1063 सीढ़ियां हैं। हालांकि, अब यहां रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।
इनके अलावा भी देश के विभिन्न राज्यों में प्रमुख देवी मंदिर स्थापित हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी इच्छाओं के पूरे होने की आशा लेकर आते हैं। ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र हैं, बल्कि स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत के भी बेहतरीन उदाहरण हैं।

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