September 10, 2026

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रूस-चीन बढ़ता सैन्य सहयोग, PLA के दौरे से भारत की चिंता बढ़ी

मॉस्को
रूस और चीन के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है। रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एक निरीक्षण टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले में कई ठिकानों का दौरा किया। इसमें सुदूर-पूर्वी ज्यूइश ऑटोनॉमस रीजन में मौजूद एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यह दौरा यह दौरा दशकों पुराने 'भरोसा बढ़ाने वाले तंत्र' के तहत किया गया। इसी दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन और रूस को कुदरती सहयोगी और पार्टनर बताया और जोर दिया कि उनके बीच बढ़ता सैन्य सहयोग किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है।

रूसी समाचार एजेंसी TASS ने जिला कमांड के प्रेस ऑफिस का हवाला देते हुए बताया कि 2-3 जून को PLA का यह निरीक्षण दौरा चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच हुए समझौतों के तहत एक सामान्य जांच प्रक्रिया थी। सीमावर्ती इलाकों में सैन्य क्षेत्र में भरोसा बढ़ाने पर 1996 का समझौता और सीमावर्ती इलाकों में सैन्य बलों में आपसी कटौती पर 1997 का समझौता उस कूटनीतिक ढांचे का हिस्सा थे, जो बाद में 'शंघाई फाइव' तंत्र और अंततः चीन और रूस के नेतृत्व वाले 'शंघाई सहयोग संगठन' (SCO) ब्लॉक में बदल गया।

रूस ने चीनी सेना को मिलिट्री बेस का दौरा क्यों कराया?
रूसी पक्ष ने PLA के इस दौरे को इस बात का सबूत बताया कि तीन दशक पहले बनाए गए तंत्र आज भी असरदार और प्रासंगिक हैं। TASS ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "निरीक्षण के दौरान, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पुष्टि की कि रूसी संघ ने अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाया है और चीन के साथ समझौतों के तहत स्थापित निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता की तारीफ की।"

चीनी सेना ने रूस की तारीफ की
रूसी समाचार वेबसाइट इजवेस्टिया के अनुसार, चीनी टीम का नेतृत्व कर रहे सीनियर कर्नल लियू जिन्सॉन्ग ने कंट्रोल सिस्टम की पारदर्शिता और संगठन व लॉजिस्टिक्स के मामले में मिले सहयोग की तारीफ की। लियू ने कहा, "दोनों पक्षों के रणनीतिक नेतृत्व में… हम आपसी समझ बनाएंगे और दोनों देशों के बीच दोस्ती को और मजबूत करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा, "और खासकर इन पांच देशों के बीच हुए समझौते के दायरे में, हम इस क्षेत्र का विकास करना जारी रखेंगे और अपने आपसी फायदे वाले सहयोग को और मजबूत करेंगे।" रूसी प्रेस रिपोर्टों के अनुसार, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सैन्य जिले में 'इटरनल फ्लेम मेमोरियल कॉम्प्लेक्स' पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

हम स्वाभाविक सहयोगी और साझेदार हैं। हम पड़ोसी हैं। पड़ोसी चुने नहीं जाते। हम बस चीन के साथ काम करते हैं और दोस्त हैं – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के हितों के लिए।

रूस ने एयर डिफेंस यूनिट की जानकारी छिपाई
लेकिन मीडिया रिपोर्टों में इस दौरे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई, जिसमें शामिल विशिष्ट एयर-डिफेंस यूनिट के बारे में भी कोई ब्योरा नहीं था। 1996 और 1997 के समझौते, चीन और सोवियत संघ के बीच दशकों तक चली सीमा पर तनाव और 1969 में उत्तर-पूर्वी चीन के हेइलोंगजियांग प्रांत में उसुरी नदी के पास हुई सशस्त्र झड़पों के बाद हुए थे। उस समय परमाणु शक्ति संपन्न ये पड़ोसी देश एक-दूसरे को गहरे शक की नजर से देखते थे – यह स्थिति 1990 के दशक की शुरुआत तक बनी रही।

रूस-चीन सैन्य सहयोग उच्चतम स्तर पर
पिछले दशक में, चीन और रूस ने नियमित संयुक्त अभ्यास, प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक बॉम्बर गश्त, कई क्षेत्रों में नौसैनिक अभ्यास और सेनाओं के बीच लगातार बेहतर होते आदान-प्रदान के जरिए अपने रक्षा सहयोग का विस्तार किया है। पुतिन ने 20 मई को चीन की 25वीं आधिकारिक यात्रा के दौरान बीजिंगमें कहा कि चीन के साथ संबंध "अभूतपूर्व उच्च स्तर" पर पहुंच गए हैं। गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान बोलते हुए, रूसी नेता ने उन सुझावों को खारिज कर दिया कि उन्होंने यूक्रेन युद्ध के बाद चीन के प्रति "कोई यू-टर्न" लिया है। उन्होंने कहा, "हम स्वाभाविक सहयोगी और साझेदार हैं। हम पड़ोसी हैं। पड़ोसी चुने नहीं जाते।"

रूस-चीन दोस्ती से भारत को कैसे खतरा?
भारत सैन्य साजोसामान के लिए लंबे समय से रूस पर निर्भर है। आज भी भारतीय सेना के लगभग 50% से 90% सैन्य उपकरण और हथियार रूस (या पूर्व सोवियत संघ) से आते हैं।
यह रूसी साजोसामान भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना की रीढ़ हैं। एयर डिफेंस के मामले में भी भारत बहुत हद तक रूसी सिस्टमों का इस्तेमाल करता है।
इनमें अत्याधुनिक S-400 मिसाइल सिस्टम से लेकर इगला-एस MANPADS, कुब (KUB) और पेचोरा (Pechora) एयर डिफेंस सिस्टम प्रमुख हैं।
ऐसे में इन सिस्टमों तक चीन की पहुंच भारत के लिए खतरे की बात है। चीन इस डिफेंस सिस्टम की कमजोरियों का पता लगा सकता है।
इसके अलावा चीन के साथ संघर्ष की स्थिति में रूस खुद को तटस्थ बना सकता है, जिससे भारत के लिए जरूरी सैन्य साजोसामान की आपूर्ति में समस्या आ सकती है।

 

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