पश्चिम एशिया के तनाव में तेजी कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा रही है। ईरान-अमेरिका…
पश्चिम एशिया के तनाव में तेजी कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा रही है। ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे इस युद्ध के कारण न केवल तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है बल्कि इसका असर भारत के तेल आयात बिल पर भी देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात बिल 77% बढ़कर 4.64 लाख करोड रुपये पर पहुंच गया।
आपको बता दे कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच अभी भी तनाव खत्म नहीं हुआ है। दोनों देश एक दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं और नए हमलों की धमकी दे रहे हैं। जिससे कयास यह लगाए जा रहे हैं कि यदि हालत जल्दी नहीं सुधारते हैं तो आने वाले समय में भी देश के तेल आयात बिल में और उछाल देखा जा सकता है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत का तेल आयात बिल
पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार अप्रैल से जून के बीच कच्चे तेल की खरीदारी पर भारत ने 2.02 लाख करोड रुपये ज्यादा चुकाए। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी जारी थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस अवधि में हमारा तेल आयात बिल तो बढ़ा है, लेकिन आयात की मात्रा कम हो गई है। होर्मूज बंद रहने के कारण सप्लाई संकट का सामना करना पड़ा था। इससे पहले तिमाही में तेल की खरीदारी में 4.5% की गिरावट आई। हालांकि भारत ने इस दौरान अन्य देशों से खरीदारी की।
कच्चे तेल की कीमतें
21 जुलाई 2026 दिन मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क WTI क्रूड की कीमत सुबह 6.36 बजे 0.49% की गिरावट के बाद 82.22 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.74% की गिरावट के बाद 88.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। अभी तेल की कीमतों में मामूली गिरावट दिखाई दे रही है लेकिन पश्चिम एशिया तनाव जारी है जिसके कारण बड़ा उछाल आ सकता है। कल ही ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई थी।
कितना तेल खरीदता है भारत?
आपको बता दें कि भारत में हर साल लगभग 1.8-2 अरब बैरल कच्चा तेल खरीदा जाता है। भारत बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में केवल $1 की वृद्धि से ही भारत का आयात बिल कई करोड़ रुपए बढ़ जाता है। इस समय अमेरिका और ईरान के बीच हालात तुरंत सामान्य होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। जब तक दोनों देशों के बीच शांति समझौते को फिर से लागू नहीं किया जाता तब तक सप्लाई सामान्य नहीं होगी और तेल की कीमतों में तेजी जारी रहेगी। जिससे न केवल भारत कोना केवल तेल खरीदारी में परेशानी आ रही है बल्कि ज्यादा कीमतें भी चुकानी पड़ रही है।

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