गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में मंगलवार को (7 जुलाई) अपना फैसला सुनाया है. 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में एक के बाद एक कई बम धमाके हुए थे. दो दिन बाद सूरत से भी कई जिंदा बम बरामद किए गए थे.
गुजरात हाईकोर्ट ने मामले में 38 दोषियों की फांसी की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा. इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे. कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायलों को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है. यह राशि 31 मार्च 2027 तक देने को कहा गया है.
फरवरी 2022 में अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 38 दोषियों को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट की जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की बेंच ने सभी दोषियों की अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को सही मानते हुए इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के दोषी सदस्यों की फांसी और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा.
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है. इसे उन्होंने भारत के सबसे सख्त और ऐतिहासिक फैसलों में से एक बताया और लिखा- जय हिंद.
अहमदाबाद में 26 जुलाई, 2008 को 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. शहर के कुछ अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया था.

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