July 8, 2026

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SEBI ने बदले नियम : अब रुपये में होगी FPI फीस की पेमेंट, म्युचुअल फंड के नियम भी बदले

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) नियमों में बदलाव करते हुए शुल्क भुगतान की व्यवस्था को अमेरिकी डॉलर की जगह भारतीय रुपये में कर दिया है। यह बदलाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (FVCI) दोनों पर लागू होगा। नए नियम छह महीने बाद प्रभावी होंगे, ताकि विदेशी निवेशकों को नई व्यवस्था अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

3 जुलाई की अधिसूचना के अनुसार, FPI नियमों के रेगुलेशन 43B(2) में 1,000 अमेरिकी डॉलर की जगह अब 90,000 रुपये (समतुल्य विदेशी मुद्रा में) शुल्क निर्धारित किया गया है। सेबी ने कैटेगरी-I FPI और FVCI के रजिस्ट्रेशन शुल्क को 2,500 डॉलर से बदलकर 2.3 लाख रुपये कर दिया है। इसी तरह, देरी से भुगतान (लेट फीस) और कंटिन्यूएंस फीस में भी संशोधन किया गया है।

भारत में FPI के लेनदेन संभालने वाले डिजिग्नेटेड डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (DDPs) को रजिस्ट्रेशन मिलने के पांच कार्य दिवस के भीतर यह शुल्क सेबी को जमा कराना होगा।

आवेदन प्रक्रिया भी होगी आसान
कम्प्लायंस और ऑपरेशंस को आसान बनाने के लिए FPI रजिस्ट्रेशन के कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म में अब जन्म तिथि या कंपनी के गठन की तिथि भी शामिल की जाएगी। इसका मकसद मार्च में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा जारी नई अधिसूचना के बाद PAN आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

FY26 में सेबी को मिले करीब 1,300 करोड़ रुपये?
सेबी को वित्त वर्ष 2025-26 में FPI और FVCI से रजिस्ट्रेशन, कंटिन्यूएंस और अन्य शुल्क के रूप में 1.298 करोड़ अमेरिकी डॉलर (12.98 मिलियन डॉलर) प्राप्त हुए। इस राशि में GST भी शामिल है। सेबी ने कहा कि डॉलर में शुल्क लेने के कारण मैनुअल अकाउंटिंग, इनवॉइसिंग और रियल-टाइम अकाउंटिंग में दिक्कतें आती थीं। इससे वित्तीय रिपोर्टिंग में भी देरी होती थी। नई व्यवस्था से इन समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।

सेबी ने कस्टोडियन द्वारा दिए जाने वाले शुल्क की व्यवस्था भी बदल दी है। अब उन्हें सालाना 10 लाख रुपये की जगह हर महीने 85,000 रुपये शुल्क देना होगा।

म्युचुअल फंड के उधारी नियमों में बदलाव
सेबी ने म्युचुअल फंड नियमों में इंट्रा-डे उधारी (Intraday Borrowing) से जुड़े बदलावों को भी अधिसूचित किया है। नए नियमों के तहत म्युचुअल फंड अब पे-इन और पे-आउट सेटलमेंट के समय के अंतर, एसेट क्लास के भीतर लेनदेन, फॉरेक्स सेटलमेंट और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए इंट्रा-डे उधार ले सकेंगे।

यह सुविधा पहले से उपलब्ध उस व्यवस्था के अतिरिक्त होगी, जिसके तहत म्युचुअल फंड योजनाएं यूनिटधारकों को भुगतान (जैसे रिडेम्प्शन) के लिए अपनी नेट एसेट्स के 20% तक कर्ज ले सकती हैं। सेबी ने साफ किया है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को दिन खत्म होने से पहले यह उधार चुकाना होगा। अगर ऐसा नहीं होता, तो उसे म्युचुअल फंड नियमों के अनुसार ओवरनाइट उधारी माना जाएगा।

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