Udaan Desk. भारतीय स्टील की कीमतों में आने वाले हफ्तों में और वृद्धि होने की उम्मीद है। अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है मानसून के बाद बुनियादी ढांचे और ऑटोमोटिव मांग में वृद्धि से बाजार में कसावट आएगी, जबकि कोकिंग कोल की बढ़ती लागत से मिलों की उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।
कोकिंग कोल की बढ़ती लागत से घटे मार्जिन को ठीक करने में बढ़ी कीमतों से मदद मिल सकती है, लेकिन बुनियादी ढांचे, निर्माण और ऑटो कंपनियों को मांग बढ़ने के साथ ही इनपुट लागत में वृद्धि भी होगी।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक चीन के बाद दुनिया के दूसरे सबसे कच्चे स्टील उत्पादक भारत की मिलों ने जून और जुलाई के बीच हॉल रोल्ड कॉइल जैसे उत्पादों की कीमत में 280 रुपये प्रति टन की मामूली कटौती की थी। वहीं कमोडिटी कंसल्टेंसी बिगमिंट के अनुसार अगस्त और सितंबर की शुरुआत के बीच एचआरसी की कीमतों में 4,000 रुपये प्रति टन की वृद्धि हुई, जो चार साल का उच्च स्तर है।
एनलाइट मेटल्स के निदेशक वेदांत गोयल ने कहा, ‘हम आने वाले हफ्तों में स्टील की कीमतों में लगभग 3,500 रुपये प्रति टन की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।’
लंदन की कंसल्टेंसी सीआरयू में स्टील के प्रिंसिपल एनॉलिस्ट शंखदीप मुखर्जी ने कहा, ‘उत्पादन लागत में कोकिंग कोल की हिस्सेदारी उल्लेखनीय होती है, ऐसे में लागत में बढ़ोतरी का बोझ मिलें ग्राहकों पर डालेंगी। ’
बिगमिंट के अनुसार, प्रमुख मिलों में रखरखाव के कारण बंदी, हाजिर उपलब्धता में कमी और वितरकों की कम इन्वेंट्री के कारण मूल्य में वृद्धि को समर्थन मिला है।
एक बड़ी स्टील मिल एक एग्जिक्यूटिव कहा कि निकट भविष्य में रखरखाव से जुड़ी बंदी, मॉनसून के बाद स्टॉक में वृद्धि, त्योहारी मांग, परियोजना की मांग और कोकिंग कोल की बढ़ती लागत से आगे मूल्य वृद्धि की संभावना है। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि आने वाले महीनों में स्टील की कीमतों में बड़ी वृद्धि की संभावना नहीं है, क्योंकि चीन से विशेष रूप से बढ़ते आयात से मिलों की मूल्य निर्धारण शक्ति सीमित हो सकती है।
भारत ने पिछले साल कुछ स्टील आयातों पर एक सुरक्षा शुल्क लगाया था ताकि विदेशी शिपमेंट में वृद्धि को रोका जा सके। इसने जून में चीन, जापान और रूस से एचआरसी आयात पर एक एंटी-डंपिंग जांच भी शुरू की थी। व्यापारिक उपायों के बावजूद आयात में वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत अप्रैल-जुलाई के बीच तैयार स्टील का शुद्ध आयातक था, जबकि तैयार स्टील का आयात पिछले वर्ष की तुलना में 36.6 प्रतिशत बढ़ा। भारत के आयात में चीन का 31 प्रतिशत हिस्सा था, जिससे यह सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।

Related Posts
पेट्रोल की चिंता खत्म? Kia Syros अब 100% Ethanol पर चलेगी, कंपनी ने दिखाया नया Flex Fuel मॉडल
ब्रोकरेज रिपोर्ट : 3 महीने में 49% तक चढ़े 5 न्यू एज शेयर, Paytm सबसे आगे, Nykaa और Honasa में भी तेजी
स्टॉक मार्केट में इन नियमों को समझें, ट्रेडिंग से पहले अनुशासन है जरूरी