भोपाल
इस साल अप्रैल में भीषण गर्मी की बजाय आंधी-बारिश और ओले वाला मौसम रहा। 1 से 9 अप्रैल तक प्रदेश में कहीं न कहीं मौसम बदला। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, शुक्रवार से प्रदेश में बारिश का दौर थमेगा और भीषण गर्मी पड़ने लगेगी।
बता दें कि अप्रैल की शुरुआत में ही आंधी-बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। गुरुवार को भी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) की एक्टिविटी देखने को मिली। इनके असर से पूर्वी हिस्से के उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट में मौसम बदला रहा।
कहीं तेज आंधी चली तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार से सिस्टम का असर खत्म हो जाएगा। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि अगले 5 दिन तक प्रदेश में कहीं भी बारिश होने का अनुमान नहीं है। यानी, मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में बढ़ोतरी होने लगेगी।
15 अप्रैल को नया सिस्टम मौसम विभाग की मानें तो 15 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा। हालांकि, एमपी में इसका असर कम ही देखने को मिलेगा।
गर्मी के लिहाज से अप्रैल-मई महीने अहम मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मध्यप्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था।
मार्च के आखिरी में टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट आई। इसी तरह अप्रैल के पहले पखवाड़े में बारिश, ओले और आंधी का दौर चल रहा है। पिछले 8 दिन से प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश हो रही है।
फरवरी-मार्च में 4-4 बार बदला मौसम इस साल जनवरी में बारिश नहीं हुई, लेकिन फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदला। ठंड के मौसम में ही फरवरी में मौसम का मिजाज बदल गया। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रहा। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा।
मार्च में गर्मी के सीजन की शुरुआत हो गई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी वाला मौसम रहा। दूसरे पखवाड़े में बारिश शुरू हो गई। एक दौर लगातार 4 दिन तक रहा। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश हुई। वहीं, 17 जिलों में ओले भी गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुई है।
तीसरा दौर 26-27 मार्च को रहा। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश हुई। सतना के चित्रकूट में आंधी चलने और बारिश होने की वजह से दीप सज्जा के कार्यक्रम पर असर पड़ा था। चौथी बार मौसम ने 29-30 मार्च को फिर से करवट बदली है। 30 मार्च को एमपी के आधे हिस्से में कहीं बारिश-आंधी तो कहीं ओले भी गिरें।

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