Udaan Desk. सोशल मीडिया पर इन दिनों 81 साल के असगर अली वोरा की खूब चर्चा हो रही है. इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी पुरानी दोस्ती और जमीन से जुड़ा करीब 15 साल पुराना विवाद है. असगर अली वोरा का दावा है कि महाराष्ट्र के भायंदर में उनकी जमीन पर लंबे समय से कब्जा है. उन्होंने इस मामले में बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर मदद और CBI जांच की मांग की थी. इसके कुछ ही दिनों बाद मामले में बड़ा घटनाक्रम हुआ. BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन से जुड़ी अपनी डील रद्द कर दी और कब्जा छोड़ने की बात कही. हालांकि, जमीन की कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
कौन हैं असगर अली वोरा?
असगर अली वोरा मुंबई के मीरा रोड इलाके में रहते हैं. उनका दावा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने स्कूल फ्रेंड हैं. दोनों ने गुजरात के वडनगर स्थित BN स्कूल में पढ़ाई की थी. 8 सितंबर 2026 को वोरा ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. उन्हें अपनी जमीन से जुड़े करीब डेढ़ दशक पुराने विवाद की जानकारी दी. वोरा ने PM मोदी से इस मामले में दखल देने के साथ-साथ CBI जांच की मांग भी रखी थी.
कहां है जमीन और क्या है विवाद?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वोरा ने बताया कि उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी. उनके मुताबिक, साल 2011 में इस जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ. उन्होंने कई सरकारी विभागों के सामने अपनी शिकायत रखी. वोरा का आरोप था कि खुद बिल्डर्स और BJP विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स ने जमीन पर कब्जा कर लिया.
15 साल तक काटे सरकारी दफ्तरों के चक्कर
वोरा का कहना है कि उन्होंने करीब डेढ़ दशक तक अलग-अलग सरकारी अधिकारियों और विभागों के सामने अपनी जमीन का मामला उठाया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला. आखिरकार उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करने का फैसला किया. 8 सितंबर को वोरा की PM मोदी से मुलाकात हुई. वोरा के मुताबिक, उन्हें प्रधानमंत्री की तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. इसके बाद मामला महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर तेजी से आगे बढ़ा.
एक बैठक में निकला समाधान
मामले को लेकर महाराष्ट्र मंत्रालय में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में बैठक हुई. इसमें असगर अली वोरा, BJP विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम की कमिश्नर राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद थे. बैठक में नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक लेटर सौंपा. इसमें उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और उस प्लॉट के लिए मिली निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही.
विधायक ने क्या कहा?
नरेंद्र मेहता की ओर से कहा गया कि संबंधित जमीन उन्होंने 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी. यानी जमीन के मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर रहा है. मेहता ने पुलिस कमिश्नर को एक अलग लेटर देकर वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है.
कब्जा छूटा पर वोरा को नहीं मिली जमीन
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP विधायक नरेंद्र मेहता के पीछे हटने के बावजूद जमीन सीधे असगर अली वोरा को नहीं मिली है. विवाद में शामिल स्वयं डेवलपर्स (Swayam Developers) ने जमीन वोरा को सौंपने से इनकार किया है. कंपनी की ओर से कहा गया है कि जनवरी 2026 में आए कोर्ट के आदेश में मामला उसके पक्ष में है.
डेवलपर की ओर से यह भी दावा किया गया है कि वोरा संबंधित सह-मालिक की पावर ऑफ अटॉर्नी पेश नहीं कर पाए थे. 1989 में उनकी ओर से 1.51 लाख रुपये के पेमेंट का सबूत भी नहीं है. कंपनी का कहना है कि उसके पास जमीन का कब्जा, अदालत का आदेश और 1.16 करोड़ रुपये के पेमेंट से जुड़ा समझौता मौजूद है.
फिलहाल इस विवाद का कानूनी पहलू पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ऐसे में असगर अली वोरा को जमीन का अंतिम और निर्विवाद कब्जा कब मिलेगा, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.

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