तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने विलय वाली पार्टी का ऐलान कर दिया है। रविवार को उन्होंने बेहद कम चर्चित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय की घोषणा की। इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वह इस अलग हुए गुट को कोई मान्यता नहीं दें। लोकसभा सदस्य सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि बागी गुट असली तृणमूल कांग्रेस के तौर पर मान्यता पाने के लिए कोर्ट में भी लड़ाई लड़ेगा और पार्टी के चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश करेगा।
20 सांसदों ने किए हस्ताक्षर
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संवाददाताओं से कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने बिरला को सौंपे गए प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई लोकसभा सदस्यों ने एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में अपना विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करेंगे।”
उनसे मिलने के बाद बागी TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, “AITC से चुने गए हम बीस सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा।
कौन सी पार्टी है NPCI?
‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ त्रिपुरा की एक कम प्रसिद्ध पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। इसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें इसके उम्मीदवार या तो नोटा से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही अधिक वोट मिले।
कोर्ट करेगी असली TMC का फैसला
बागी गुट के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ने उन 20 सांसदों के हस्ताक्षर की पुष्टि की जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। बंद्योपाध्याय ने पत्रकारों से कहा, ”हमने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया के साथ विलय कर लिया है।” ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के दावों के बारे में पूछे जाने पर बंदोपाध्याय ने कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका फैसला अदालतें करेंगी।
बंदोपाध्याय ने कहा, ”अदालत बाद में फैसला करेगी कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है। हमने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें अपना अनुरोध सौंपा है। अगले लोकसभा सत्र में हमारे बैठने की अलग व्यवस्था होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर भी दावा करेंगे।
TMC ने पत्र लिख की मान्यता नहीं देने की मांग
बता दें कि बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मिलने से पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके घर पर मुलाकात की। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी की तरफ से लिखा गया एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा, जिसमें उनसे किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया गया है। इस पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देता है।

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