June 11, 2026

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अबला ही बनी रहे नारी : शिक्षा, मिलनसारिता, और बुजुर्ग की मदद बन गया अपराध, महिला अधिवक्ता के खिलाफ साजिशें

  • सोशल मीडिया पर किया जा रहा बदनाम, साइबर थाने में शिकायत
  • मामा निकला असली कंस
  • ⁠लड़की को करवाया पैसे दे कर सोशल मीडिया में बदनाम
  • माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की उड़ाई गई धज्जियां और संविधान में निहित मौलिक अधिकार का हनन

भोपाल। महिला सशक्तिकरण के शोर के बीच एक युवती का शिक्षित, खुले विचारों और मददगार रवैया दुश्मन बन गया है। उसकी खुश मिजाजी, मिलनसारिता और सबसे घुलमिल कर रहने की आदत ने उसके खिलाफ साज़िशों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर झूठे प्रचार के लेकर पुलिस में झूठी शिकायत तक इसके खिलाफ कर दी गई है। आरोपों और झूठी शिकायत के खिलाफ महिला अधिवक्ता भी अब कानून की शरण में पहुंच गई है। जहां उसने झूठी पुलिस शिकायत को लेकर सिलसिलवार जवाब दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर किए जा झूठे और भ्रामक प्रचार के खिलाफ साइबर क्राइम का रुख किया है।

मामला राजधानी की एक महिला अधिवक्ता प्रगति श्रीवास्तव से जुड़ा है। उच्च शिक्षित, कुशल व्यवहार, सबकी मदद के आगे रहना इनकी विशेषताओं में शामिल है। व्यवहार का खिलंदड़पन ही उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। अपने सीनियर एडवोकेट निशीथ त्रिपाठी के एक NRI मामा डॉ नरेश शर्मा ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करा दिया है। नीतीश और उनके मामा के बीच रिश्तों की कटुता न जानते हुए प्रगति ने इस बुजुर्ग NRI की मदद के लिए ही हाथ बढ़ाया था, लेकिन उसको अन्य रूप देकर अलग ही रंग दे दिया गया है। हालांकि प्रगति ने अपने जवाब में इस आरोप और झूठी शिकायत का सिलसिलेवार जवाब दे दिया है। लेकिन इस पूरे कर्मकांड से उसकी जो सामाजिक, प्रोफेशनल और व्यवहारिक क्षति हुई है, उसके लिए वह कानून का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही हैं।

क्या है मामला
बुजुर्ग NRI डॉ नरेश शर्मा ने कोलार थाना में एक शिकायत दर्ज कराई है। अधिवक्ता निशीथ त्रिपाठी के खिलाफ की गई इस शिकायत में प्रगति श्रीवास्तव को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि भोपाल में खरीदी गई एक प्रॉपर्टी को धोखे से नीतीश और प्रगति ने अपने नाम कर लिया है।

वास्तविकता यह बताई जाती है
इधर सूत्रों का कहना है कोलार और अरेरा कालोनी की कुछ संपत्ति को लेकर डॉ नरेश का अपने रिश्तेदारों नीतीश और अन्य लोगों से 2018 से ही विवाद था। इन्हीं सब मामलों को लेकर डॉ नरेश ने 2022 में प्रगति से पहली बार संपर्क किया और प्रगति को कुछ न्यायालयीन मामलों का केयरटेकर बनाया था। जिसके लिए दोनों के बीच फ़ीस को ले कर डॉ नरेश शर्मा ने ख़ुद एक एग्रीमेंट बनवाया था लेकिन उसका पूरा भुगतान प्रगति को नहीं दिया गया ।

सूत्र बताते हैं कि इन्हीं सबको लेकर डॉ नरेश ने प्रगति को ऑनलाइन कुछ पैसा भेजा था, और वर्ष 2022 में जब प्रगति ने घर खरीदा तो उसका लालच भी डॉ नरेश शर्मा को आ गया और पहले उन्होंने थोड़ा थोड़ा पैसा देकर उसको बेटी माना और उसके साथ पिता जैसा व्यवहार किया लेकिन जब उनको लगा की अब और पैसा देना पड़ेगा तो उन्होंने प्रगति की सम्पति को ही हथियाने का प्लान बनाया और अपने सगे भांजे से चल रही दुश्मनी के साथ प्रगति का नाम जोड़ कर उसके उपर झूटे आरोपों की झड़ी लगा दी गई और हद तो तब हो गई जब उन्होंने अपनी मर चुकी बहन का आधार बना कर प्रगति पर झूठे आरोप लगाए जिसको प्रगति ने कभी देखा भी नहीं था आलम अब यह है कि प्रगति पर धोखाधड़ी के झूठे आरोप गढ़े जा रहे हैं।

पुलिस की जल्दबाजी
बताया जाता है कि इस मामले में कोलार पुलिस ने NRI के दबाव में आकर कई त्वरित और जल्दबाजी वाले फैसले लिए हैं, जिनके जवाब तलब किए जा सकते हैं। पुलिस ने बिना कोई जांच या पूछताछ किए प्रगति श्रीवास्तव को सह आरोपी बना दिया है, जबकि उनके खिलाफ थाने में कोई माकूल प्रमाण पेश नहीं किए गए हैं।

मीडिया(?) का रुख
इस मामले में कुछ इंफ्लुएंसर ने और और व्यूज़ की लालच में सोशल मीडिया पर प्रगति को लेकर दुष्प्रचार शुरू कर दिया है, जिसमें उनके खिलाफ धोखाधड़ी की बात कही जा रही है। फोटो और नाम के साथ किए जा रहे इस झूठे प्रचार की मीडिया संविधान में जगह नहीं है। आरोप सिद्ध होने से पहले किसी को आरोपी करार दिए जाने के इस व्यवहार के खिलाफ प्रगति अब चुप नहीं बैठने वाली है शिकायत का दायरा यह भी बताया जा रहा है अब उनके व्यक्तिगत जीवन को लेकर बदनाम करने की धमकियां भी इनको दी जा रही हैं।

प्रगति का कहना
प्रगति श्रीवास्तव इस पूरे मामले को लेकर आहत है। कहती हैं कि अपने पिता की उम्र के व्यक्ति से उन्हें इस व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। जिस तरह से उन्हें सोशल मीडिया पर बदनाम किया जा रहा है, वह भी असहनीय है। इंसाफ के लिए उन्हें कानून पर भरोसा है, लेकिन इस साजिश ने उनके महिला सशक्तिकरण के सरकारी प्रयासों से विश्वास डिगा दिया है।

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