12वीं साइंस पास करने के बाद ज्यादातर स्टूडेंट्स का एक ही सपना होता है एमबीबीएस (MBBS). लेकिन NEET परीक्षा का तगड़ा कॉम्पिटिशन और सीमित सीटें हर किसी को डॉक्टर बनने का मौका नहीं देतीं. अगर आप भी नीट क्लियर नहीं कर पाए हैं, तो बिल्कुल परेशान मत हों. मेडिकल फील्ड सिर्फ एमबीबीएस तक ही सीमित नहीं है.
आज के समय में हेल्थकेयर सेक्टर में कई ऐसे बेहतरीन पैरामेडिकल और अलाइड हेल्थ कोर्सेज हैं, जिनमें एडमिशन के लिए नीट की जरूरत नहीं होती. सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें पढ़ाई पूरी करने के बाद आपको बेहतरीन क्लिनिकल एक्सपोजर और डॉक्टर जितनी ही शानदार सैलरी मिलती है. आइए जानते हैं इन टॉप 5 कोर्सेज के बारे में…
1. बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT)
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, स्पोर्ट्स इंजरी और लाइफस्टाइल की वजह से फिजियोथेरेपिस्ट की डिमांड आसमान छू रही है.
कोर्स की अवधि : 4.5 साल (इसमें 6 महीने की इंटर्नशिप शामिल है).
क्या काम होता है : फिजियोथेरेपिस्ट बिना दवाओं और सर्जरी के, सिर्फ एक्सरसाइज और थेरेपी के जरिए मरीजों के दर्द और हड्डियों की दिक्कतों को ठीक करते हैं.
कमाई और स्कोप : कोर्स के बाद आप खुद का क्लिनिक खोल सकते हैं या बड़े अस्पतालों और स्पोर्ट्स टीमों के साथ जुड़ सकते हैं. शुरुआत में 3 से 5 लाख रुपये सालाना का पैकेज आसानी से मिल जाता है, जो अनुभव के साथ 8 से 10 लाख रुपये तक पहुंच जाता है.
2. बैचलर ऑफ फार्मेसी (B Pharm)
दवाइयों की दुनिया हमेशा डिमांड में रहती है. कोरोना महामारी के बाद से फार्मा सेक्टर में नौकरियों की बाढ़ आई हुई है.
कोर्स की अवधि : 4 साल.
क्या काम होता है : इसमें दवाइयों के निर्माण, टेस्टिंग और उनके असर के बारे में पढ़ाया जाता है.
कमाई और स्कोप : इस कोर्स को करने के बाद आप ड्रग इंस्पेक्टर बन सकते हैं, किसी बड़ी फार्मा कंपनी में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में जा सकते हैं या अपना खुद का मेडिकल बिजनेस शुरू कर सकते हैं. शुरुआती सैलरी 3 से 4.5 लाख रुपये सालाना होती है.
3. बीएससी इन रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी
हॉस्पिटल में जब भी कोई मरीज जाता है, तो डॉक्टर सबसे पहले एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने को कहते हैं. यहीं पर काम आता है एक रेडियोलॉजिस्ट.
कोर्स की अवधि : 3 साल.
क्या काम होता है : स्टूडेंट्स को एडवांस मेडिकल इमेजिंग मशीनें (जैसे MRI, CT Scan, Ultrasound) ऑपरेट करना सिखाया जाता है.
कमाई और स्कोप : अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स में इन प्रोफेशन्स की भारी कमी है, इसलिए यहाँ जॉब सिक्योरिटी 100% है. शुरुआती सैलरी 4 से 6 लाख रुपये सालाना तक हो सकती है.
4. बीएससी इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी
बीमारी का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट या यूरिन टेस्ट सबसे जरूरी होता है. लैब टेक्नोलॉजी के बिना मेडिकल साइंस अधूरा है.
कोर्स की अवधि : 3 साल.
क्या काम होता है : इसमें तरह-तरह के मेडिकल टेस्ट करना और बीमारियों की जांच करना सिखाया जाता है.
कमाई और स्कोप : आप अपनी खुद की पैथोलॉजी लैब खोल सकते हैं या बड़े अस्पतालों की लैब्स के हेड बन सकते हैं. इसमें शुरुआती पैकेज 3 से 5 लाख रुपये सालाना तक रहता है.
5. बीएससी नर्सिंग (BSc Nursing)
हेल्थकेयर सिस्टम की रीढ़ की हड्डी नर्स ही होती हैं. डॉक्टरों के बाद मरीजों की देखभाल का पूरा जिम्मा इन्हीं पर होता है.
कोर्स की अवधि : 4 साल.
क्या काम होता है : मरीजों की क्रिटिकल केयर, दवाइयों का मैनेजमेंट और डॉक्टरों की मदद करना.
कमाई और स्कोप : भारत के साथ-साथ विदेशों (जैसे यूके, कनाडा, गल्फ देश) में भारतीय नर्सों की भारी डिमांड है. भारत में शुरुआती सैलरी 3 से 4 लाख रुपये सालाना होती है, लेकिन सरकारी नौकरी या विदेश जाने पर यह पैकेज 10 से 15 लाख रुपये सालाना से भी ज्यादा हो सकता है.
कैसे मिलता है एडमिशन?
इन कोर्सेज में एडमिशन के लिए ज्यादातर कॉलेज 12वीं के मार्क्स के आधार पर डायरेक्ट एडमिशन देते हैं. वहीं कुछ नामी यूनिवर्सिटीज (जैसे IPU, जामिया हमदर्द या स्टेट मेडिकल बोर्ड्स) अपने स्तर पर छोटे एंट्रेंस एग्जाम आयोजित करती हैं, जो नीट जितने कठिन नहीं होते.

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