June 17, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

टेलीग्राम पर सियासी संग्राम : राहुल गांधी बोले-यह चोर को पकड़ने की बजाय पीड़ित के घर ताला लटकाने जैसा समाधान

नीट-यूजी परीक्षा से ठीक पहले टेलीग्राम ऐप पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर अब केंद्र की मोदी सरकार विपक्ष और छात्र संगठनों के निशाने पर आ गई है। सरकार के इस कदम को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस पर नया सियासी संग्राम शुरू हो गया है। विपक्ष द्वारा इसे पेपर लीक रोकने का एक ‘दिखावटी नुस्खा’ बताते हुए सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए विपक्षी विचारकों और छात्र हितैषियों का कहना है कि यह कदम ऐसा है, मानो चोर को पकड़ने के बजाय पीड़ित के ही घर पर ताला लटका दिया जाए। लाखों छात्र सालों से टेलीग्राम का उपयोग अपनी पढ़ाई, नोट्स शेयरिंग, टेस्ट सीरीज़ और परीक्षा की तैयारी से जुड़े डिस्कशन के लिए करते आ रहे हैं। ऐसे में छात्रों से यह डिजिटल सुविधा छीन लेना किसी भी तरह से पेपर लीक का तार्किक समाधान नहीं हो सकता।

क्या अगला नंबर व्हाट्सएप का होगा?

सवालों के घेरे में सरकार की यह नीति भी है कि यह प्रतिबंध पूरी तरह से फूलप्रूफ नहीं है। देश का आम छात्र और पेपर लीक माफिया दोनों ही यह जानते हैं कि डिजिटल युग में संवाद के कई अन्य रास्ते खुले हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यदि टेलीग्राम बैन करने के बाद भी चीजें नहीं रुकीं, तो क्या अगला प्रतिबंध व्हाट्सएप (WhatsApp) या अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर लगाया जाएगा? क्या हर समस्या का समाधान सिर्फ पाबंदी लगाना ही है?

‘Telegram Ban’ – मोदी सरकार का पेपर लीक रोकने का नया नुस्खा।

यानी चोर को पकड़ने के बजाय, पीड़ित के घर पर ताला लटका दो।

लाखों छात्र सालों से Telegram पर पढ़ते हैं – नोट्स, टेस्ट सीरीज़, डिस्कशन, तैयारी। वो सुविधा छीन लेना पेपर लीक का समाधान कैसे हुआ?

और यह फूलप्रूफ भी नहीं है… https://t.co/LkiRN1oLTj

— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 17, 2026

‘दिखावे की कोई कमी नहीं, पर जड़ पर वार नहीं’

आरोप लगाया जा रहा है कि परीक्षा के दिनों में छात्रों की सघन तलाशी ली जाती है, सुरक्षा के नाम पर उनकी जेबें तक कैंची से काट दी जाती हैं और प्रश्नपत्रों को वायुसेना के जरिए भेजने जैसे बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। सुरक्षा के इस तामझाम और दिखावे में कोई कमी नहीं छोड़ी जाती, लेकिन बीमारी की असली जड़ पर कोई वार नहीं होता। आलोचकों का सीधा आरोप है कि पेपर लीक माफिया इसी व्यवस्था की देख-रेख में फल-फूल रहा है और देश के करोड़ों युवाओं को खून के आंसू रुला रहा है।

युवाओं की चेतावनी: ‘दिखावा छोड़िए, माफिया पर वार कीजिए’

छात्र संगठनों और युवा नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए अपील की है कि वे अब यह प्रशासनिक दिखावा बंद करें। सरकार को अपनी नीतियों का रुख छात्रों के बजाय सीधे उस परीक्षा माफिया की तरफ मोड़ना चाहिए जो युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। ‘छात्रों की गूंज’ को अनसुना न करने की चेतावनी देते हुए कहा गया है कि देश का युवा अब जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए लड़ना अच्छी तरह जानता है।

Spread the love