June 18, 2026

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हे राम! भगवान रामलला के चढ़ावे वाले सोने में भी हेराफेरी, जांच तेज

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें चढ़ावे में मिले सोने को लेकर करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोपों के मुताबिक, श्रद्धालुओं द्वारा भगवान रामलला को अर्पित किए गए सोने का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया, जिसके चलते बड़े स्तर पर हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में आने वाला सोना कभी दान पेटी में डाला जाता था तो कभी पुजारियों के माध्यम से मंदिर प्रबंधन तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद इसकी गणना और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाती थी। इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी होने की बात सामने आ रही है, जिससे सोने के दुरुपयोग की संभावना बढ़ गई है। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं और SIT भी कई पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) के बीच पहले एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत राम मंदिर परिसर में SPMCIL का एक काउंटर स्थापित किया जाना था, जहां श्रद्धालु सोना या आभूषण दान कर सकें और बदले में उन्हें आधिकारिक रसीद दी जाए। इसका उद्देश्य दान में मिले सोने का पारदर्शी रिकॉर्ड रखना था।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि मंदिर परिसर में उपयुक्त स्थान न मिलने के कारण यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। नतीजतन, यह सिस्टम शुरू ही नहीं हो पाया और पुरानी अव्यवस्थित व्यवस्था के तहत ही चढ़ावा जारी रहा। इस कारण सोने की ट्रैकिंग और रिकॉर्डिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि एक योजना यह भी थी कि मंदिर में चढ़ाए गए सोने से धार्मिक सिक्के तैयार किए जाएं, जिन्हें श्रद्धालु खरीद सकें। लेकिन इस योजना को भी अमल में नहीं लाया जा सका। आरोप यह भी हैं कि चढ़ावे की सही गणना न होने के कारण सोने के दुरुपयोग और चोरी जैसी घटनाएं संभव हुईं।

थोक व्यापारी और डिपार्टमेंट स्टोर

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई स्तरों पर गड़बड़ी हुई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर सोने का सही रिकॉर्ड क्यों नहीं रखा गया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। फिलहाल, यह मामला जांच के दायरे में है और आधिकारिक तौर पर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन आरोपों के सामने आने के बाद राम मंदिर के चढ़ावे की व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

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