June 19, 2026

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राम मंदिर दान विवाद मामला : नृपेंद्र मिश्रा ने निगरानी व्यवस्था पर उठाए सवाल

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर परिसर में कथित दान घोटाले और जमीन खरीद में अनियमितताओं के आरोपों पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दान से जुड़ी गड़बड़ी की जानकारी सबसे पहले एक अनपेक्षित स्थान से मिली, जिसके बाद तत्काल जांच शुरू कराई गई।

उन्हें सूचना मिली थी कि मंदिर परिसर में एक स्थान के पास, जहां टॉयलेट के नजदीक एक कमरे में धनराशि संदिग्ध अवस्था में पाई गई। इसके बाद यह जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक पहुंची, जो आधे घंटे के भीतर मौके पर पहुंचे और तुरंत जांच शुरू कराई गई। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से एसआईटी जांच की सिफारिश की गई।

मिश्रा ने कहा कि दान संग्रह और उसकी गणना से जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारियां पहले से तय हैं, जिसमें बैंक और ट्रस्ट दोनों की भूमिका स्पष्ट है। उन्होंने यह भी बताया कि दान काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों के लिए नियम हैं, जैसे कि किसी के कपड़ों में जेब तक नहीं होनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। चंपत राय पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए मिश्रा ने कहा कि उन पर सीधे तौर पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चंपत राय लंबे समय से मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और उन्होंने हर चुनौती का सामना किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि निगरानी व्यवस्था में खामियां रही हैं।

मिश्रा के अनुसार, मंदिर परिसर में करीब 800 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और एक कंट्रोल रूम भी स्थापित है, जिसे पुलिस देखती है। लेकिन उन्होंने माना कि सीसीटीवी सिस्टम का अपेक्षित स्तर पर उपयोग नहीं हो पाया, जिससे निगरानी प्रभावित हुई। जमीन खरीद को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में पारदर्शिता को लेकर कुछ कमियां रही थीं, जिसे उन्होंने “पहली चेतावनी” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में जमीन खरीद प्रक्रिया जटिल है क्योंकि कई भूमि रिकॉर्ड नजूल श्रेणी में आते हैं, जिससे कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ जाती हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि यदि खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती तो बेहतर परिणाम मिल सकते थे। इस मुद्दे को उन्होंने “दूसरी और अंतिम चेतावनी” करार देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। मिश्रा ने जोर देकर कहा कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े सभी वित्तीय व प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के विवाद या संदेह की गुंजाइश न रहे।

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