June 20, 2026

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अभिज्ञान मोबाइल एप : चंद सेकेंड में अपराधियों की कुंडली आएगी सामने, खुलेगा काला चिट्ठा

देश की कानून-व्यवस्था को और अधिक आधुनिक और चुस्त बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में अभिज्ञान मोबाइल एप्लिकेशन को लॉन्च किया, जो पुलिस बल के लिए किसी डिजिटल हथियार से कम नहीं है। अब पुलिसकर्मियों को संदिग्धों की पहचान करने के लिए उन्हें थाने ले जाने या लंबी कागजी कार्रवाई का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।

क्या है ABHIGYAN ऐप?

NCRB का ABHIGYAN ऐप पुलिस के लिए एक डिजिटल गेम-चेंजर है, जिसमें 1.3 करोड़ अपराधियों की जानकारी सीधे पुलिस के स्मार्टफोन पर मिल जाएगी। ये पोर्टेबल टूल पुलिसकर्मियों को मौके पर ही संदिग्धों के फिंगरप्रिंट स्कैन कर उनकी आपराधिक कुंडली निकालकर देगा। इससे पुलिस को जांच में आसानी होगी।

35 सेकेंड में पूरी कुंडली आएगी सामने

इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत उसकी स्पीड है। डेमो में दिखाया गया है कि ये ऐप सिर्फ 35 सेकंड के भीतर फिंगरप्रिंट को डेटाबेस से मैच कर देता है। पुलिसकर्मी मौके पर ही संदिग्ध का बायोमेट्रिक ले सकेंगे और चंद सेकंड में उन्हें पता चल जाएगा कि व्यक्ति वांटेड है या नहीं। इस डेटाबेस में न केवल सामान्य अपराधी, बल्कि 9.91 लाख नशीले पदार्थों के तस्करों, 3.65 लाख मानव तस्करी के मामलों से जुड़े लोगों और जेल में बंद अपराधियों का व्यापक रिकॉर्ड शामिल है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इस ऐप में टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन की व्यवस्था की गई है, जिससे डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे।

‘अभिज्ञान’ ऐप का आना जमीनी स्तर पर काम करने वाली पुलिस के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा। अक्सर गश्त या नाकाबंदी के दौरान पुलिस को संदिग्धों को पहचानने में भारी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह से ‘रियल-टाइम’ और पारदर्शी हो गई है। ये तकनीक न केवल पुलिस के काम को आसान बनाएगी, बल्कि अपराधियों के मन में यह डर भी पैदा करेगी कि वे कानून की नजरों से बचकर कहीं नहीं जा सकते। यह पहल भारतीय पुलिस को दुनिया की सबसे आधुनिक और वैज्ञानिक जांच एजेंसियों की कतार में खड़ा करने की एक ठोस कोशिश है।

कैसे काम करता है ये ऐप?

  1. सबसे पहले पुलिस संदिग्ध शख्स की उंगली अभिज्ञान ऐप पर लगाएगी
  2. उसके बाद वो शख्स की उंगली का स्कैन करेगा
  3. स्कैन किया गया डेटा तुरंत NAFIS डेटाबेस में भेजा जाता है
  4. सिस्टम कुछ ही सेकेंड में रिकॉर्ड का मिलान करता है
  5. रिकॉर्ड मिलने पर व्यक्ति की पहचान सामने आ जाती है
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