June 26, 2026

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नई चिंता: यदि कमजोर रहा मानसून तो महंगी हो जाएंगी खाने पीने की चीजें, जानें कितना पड़ेगा असर?

इस साल कमजोर मानसून भारत के लिए महंगाई की नई चिंता बन सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो (El Niño) बनने की संभावना बढ़ रही है। अगर ऐसा हुआ तो बारिश कम हो सकती है, जिससे फसलों को नुकसान होगा और खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। ऐसे समय में भले ही कच्चे तेल की कीमतें कम हो रही हों, लेकिन खाने की महंगाई उस राहत को कम कर सकती है।

भारत में खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। देश में होने वाली करीब 70% बारिश जून से सितंबर के बीच होती है। अगर बारिश ठीक नहीं हुई तो इसका असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

सबसे पहले गांवों में असर दिखेगा
एलएंडटी फाइनेंस की अर्थशास्त्री रजनी ठाकुर का कहना है कि खराब मानसून का असर सबसे पहले गांवों में दिखता है। किसान खाद कम खरीदते हैं, ट्रैक्टर लेने का फैसला टाल देते हैं और त्योहारों से पहले खर्च भी कम कर देते हैं। इसका असर धीरे-धीरे बाजार और कंपनियों की बिक्री पर भी पड़ता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि वह मानसून और महंगाई की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर है, लेकिन अगर खाने-पीने की चीजें ज्यादा महंगी होती हैं तो आगे कदम उठाए जा सकते हैं।

क्वांटइको रिसर्च की अर्थशास्त्री युविका सिंघल के मुताबिक अगर बारिश सामान्य से 10% कम रहती है तो खुदरा महंगाई करीब 1% तक बढ़ सकती है। 22 जून तक देश में सामान्य से 43% कम बारिश दर्ज की गई थी, जिससे चिंता बढ़ गई है।

सरकार के पास अनाज का स्टॉक है, लेकिन…
सरकार के पास गेहूं और चावल का अच्छा भंडार है, जिससे इनकी कीमतों को कुछ हद तक काबू में रखा जा सकता है। लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि दाल, तिलहन और मोटे अनाज के मामले में ऐसी राहत नहीं है। अगर बारिश लंबे समय तक कम रही तो इन चीजों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। साथ ही भारत खाने का तेल दक्षिण-पूर्व एशिया से आयात करता है। अगर वहां भी बारिश कम हुई तो खाद्य तेल भी महंगा हो सकता है।

सबनवीस का अनुमान है कि अगर मौसम नहीं सुधरा तो अक्टूबर तक महंगाई 5.5% से ऊपर जा सकती है। ऐसी स्थिति में RBI को ब्याज दरें बढ़ाने पर भी विचार करना पड़ सकता है।

सरकार ने शुरू की तैयारी
केंद्र सरकार ने कम बारिश की आशंका वाले 315 जिलों की पहचान की है। इनमें 111 जिलों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है। इन इलाकों में किसानों को वैकल्पिक फसल, पानी बचाने के तरीके और दूसरी जरूरी मदद देने की तैयारी की जा रही है।

साल 2023 में कमजोर मानसून के बाद सरकार ने चावल के निर्यात पर रोक लगाई थी ताकि घरेलू बाजार में कीमतें न बढ़ें। फिलहाल इस साल सरकार की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

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