झारखंड के पलामू जिले से अंधविश्वास की एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां महज 10 दिनों के भीतर एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि बीमार होने के बावजूद परिवार के लोग अस्पताल में नियमित इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक और तांत्रिक के बताए उपायों पर भरोसा कर रहे थे।
कथित तौर पर एक ओझा के कहने पर परिवार के सदस्य राख का सेवन भी कर रहे थे, जिसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच शुरू कर दी है और राख समेत अन्य नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल परिवार के तीन अन्य सदस्य रांची के रिम्स में भर्ती हैं। इस घटना ने एक बार फिर अंधविश्वास और वैज्ञानिक उपचार की अनदेखी के खतरनाक परिणामों को उजागर कर दिया है। यह मामला पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव का है।
10 दिन में परिवार के 5 लोगों की गई जान
जानकारी के अनुसार, परिवार के मुखिया कुलदीप महतो की 19 जून को मौत हुई थी। अगले दिन उनकी बेटी ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य इलाज के साथ-साथ लेस्लीगंज के पूर्णाडीह इलाके में झाड़-फूंक कराने जाते रहे। इसी दौरान कथित तौर पर वे राख का भी सेवन करते रहे। इसके बाद 26 जून को कुलदीप महतो की दूसरी बेटी इंदु कुमारी की मौत हो गई।
28 जून को बहू श्वेता कुमारी और 29 जून को बेटे नकुल महतो की भी इलाज के दौरान रांची स्थित रिम्स में मौत हो गई।इस तरह दस दिनों के भीतर परिवार के पांच सदस्यों की जान चली गई। परिवार के तीन अन्य सदस्य, जिनमें कुलदीप महतो की पत्नी लाखो देवी, एक बेटा और एक पोता शामिल हैं, फिलहाल झारखंड के रिम्स में भर्ती हैं। चिकित्सकों के अनुसार, सभी मरीजों में शरीर में सूजन आने के बाद हालत तेजी से बिगड़ने की शिकायत सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही जांच
तो वहीं मामले को गंभीरता से देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिक्का गांव और पूर्णाडीह पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। टीम ने उस राख के नमूने एकत्र किए हैं, जिसके सेवन की बात सामने आई है। इसके अलावा परिवार द्वारा उपयोग किए गए खाद्य पदार्थों और अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है।
जांच के लिए भेजी गई राख सामाग्री
पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि परिवार के लोगों को कई बार अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी गई थी, लेकिन वे चिकित्सा के साथ झाड़-फूंक का भी सहारा लेते रहे। राख खाने की जानकारी मिलने के बाद उसके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
मेडिकल कॉलेज मे रखी गई विसरा रिपोर्ट
मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सभी मृतकों का विसरा सुरक्षित रख लिया गया है, और उसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही मौतों के वास्तविक कारण की पुष्टि हो सकेगी। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि प्रारंभिक स्तर पर ड्रॉप्सी जैसी बीमारी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए परिवार द्वारा इस्तेमाल किए गए सरसों तेल समेत अन्य वस्तुओं की भी जांच कराई जा रही है।

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