CBSE ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर नया अपडेट जारी किया है. CBSE के एकेडमिक निदेशक प्रज्ञा एम सिंह ने साफतौर पर कहा कि क्लास 10वीं के मौजूदा स्टूडेंट पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं होगी. उन्होंने कहा कि क्लास 9वीं के मौजूदा छात्रों को छूट दी गई है. वे दो विदेशी भाषा और एक इंडियन लैंग्वेज पढ़ सकते हैं.
बोर्ड ने इस फैसले को लेकर गाइडलाइंस जारी की है, जिसके तहत 10वीं के छात्रों को तीसरी लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. इस फैसले से लाखों छात्र और उनके माता-पिता को राहत मिली है.
नए नियम के तहत क्या बदला है?
क्लास 10वीं के मौजूदा छात्रों पर यह न्यू लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं होगी. उन्हें पहले की तरह ही अपनी पढ़ाई जारी रखनी है. जो छात्र अभी क्लास 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे हैं, उन्हें भी आगे चलकर 10वीं क्लास में तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम देने की कोई जरूरत नहीं होगी.
क्या है CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी?
CBSE कुछ समय पहले थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) लेकर आया था, जिसे 1 जुलाई 2026 से देशभर के सभी CBSE से जुड़े स्कूलों में लागू किया जाना था. थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के तहत स्टूडेंट्स दो तीन भाषा पढ़ाई जाती, जिसमें से दो इंडियन लैंग्वेज होना जरूरी था. थ्री लैंग्वेज पॉलिसी उन स्टूडेंट्स पर लागू होगी जो इस साल (2026) में 6ठीं कक्षा में एडमिशन लेंगे.
CBSE ने क्यों बदला नियम?
CBSE के इस नियम का कई छात्र और उनके माता-पिता विरोध कर रहे थे. बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ कई राज्यों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सामूहिक विरोध का सामना करने के बाद CBSE ने अब अपने फैसले में बदलाव किया है.
कब जारी हुआ था थ्री लैंग्वेज पढ़ा जाने का फैसला?
CBSE के तहत स्कूलों में थ्री लैंग्वेज पढ़ाए जाने का फैसला 15 मई 2026 को एक सर्कुलर के तहत जारी किया गया था. जारी नोटिस के अनुसार, कक्षा 9 में तीन भाषाएं (R1, R2, R3) पढ़ने का फैसला लागू किया था, जिसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए. इस नियम को 1 जुलाई से लागू किए जाने की बात भी कही गई थी.
चौथी भाषा के रूप में फॉरेन लैंग्वेज चुन सकते हैं
बोर्ड ने मई में जारी सर्कुलर में साफ कहा था कि छात्र अलग विदेशी भाषा (इंग्लिश के अलावा जैसे कि फ्रेंच, चाइनीज आदि) पढ़ना चाहते हैं तो वे चौथी या ऑप्शनल भाषा के रूप में इसे चुन सकते हैं.

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