वैश्विक राजनीति के बदलते परिदृश्य के बीच भारत और जापान के मैत्रीपूर्ण संबंधों में एक नया और गौरवशाली अध्याय जुड़ने जा रहा है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत की राजधानी दिल्ली पहुंच चुकी हैं। पीएम मोदी ने उनका राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य व औपचारिक स्वागत करते हुए इस दौरे को ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप’ को और अधिक गहरा करने वाला बताया है।
पीएम मोदी ने किया स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए जापानी प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि भारत को ताकाइची के पहले दौरे पर उनकी मेजबानी करके बेहद खुशी हो रही है। पीएम मोदी ने गुरुवार को होने वाली उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि दोनों देशों के साझा प्रयासों से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और पूरी दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि को एक नई गति मिलेगी।
आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित रहेगा एजेंडा
प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भारत पहुंचने पर अपनी प्रसन्नता जाहिर की और बताया कि जापान के प्रधानमंत्री के तौर पर लगभग तीन साल में उनका यह पहला भारत दौरा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली चर्चा में आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे गंभीर विषय प्राथमिकता पर रहेंगे। ताकाइची का मुख्य लक्ष्य मौजूदा चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए जापान और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग को और अधिक सघन बनाना है।
16वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन
अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान, साने ताकाइची और पीएम मोदी 16वें भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन में मुख्य रूप से हिस्सा लेंगे। इस शिखर सम्मेलन का एजेंडा अत्यंत व्यापक है, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमोबाइल और सप्लाई चेन जैसे आधुनिक और रणनीतिक क्षेत्रों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों और सप्लाई चेन की मजबूती पर भी दोनों नेताओं के बीच आम सहमति बनाने की कोशिश होगी।
रक्षा और सामरिक सहयोग को मिलेगी नई मजबूती
इस उच्च स्तरीय यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य ‘आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा’ को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना भी है, जिस पर पिछले वर्ष ही सहमति बनी थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं और सैन्य तैयारियों को सुदृढ़ करना है।
इसके तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, साझा सैन्य अभ्यास और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ताकाइची की यह यात्रा भारत और जापान के बीच औद्योगिक और रणनीतिक भागीदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी, जो आने वाली ‘एशियन सेंचुरी’ को नया आकार देने में सक्षम होगी।

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