July 2, 2026

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कमजोर मानसून पर सरकार अलर्ट, मंत्रालयों को तैयारी के निर्देश

देश में कमजोर मानसून और सामान्य से कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार अलर्ट पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मंत्रालयों को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। सरकार कृषि, बिजली, जल प्रबंधन और मनरेगा समेत ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर से निपटने की रणनीति बना रही है।

देश में मानसून की धीमी रफ्तार को देखते हुए केंद्र सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में संबंधित मंत्रालयों को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून 2026 में पिछले 12 साल में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं, जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। अब तक देश में औसत से 43 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो के प्रभाव के कारण इस बार मॉनसून असमान रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम तो कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश हो सकती है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, ऊर्जा, जल शक्ति, पशुपालन एवं डेयरी, गृह और वित्त मंत्रालय को समन्वय के साथ आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।

कृषि मंत्री ने बताया कि 315 जिलों में कमजोर मॉनसून के कारण कृषि गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है। इनमें से 111 जिलों में सिंचाई की उपलब्धता 25 प्रतिशत से भी कम है।

सबसे अधिक प्रभावित जिले : मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के बजट में बढ़ोतरी पर भी विचार कर रही है। फिलहाल इस योजना का बजट 95 हजार करोड़ रुपये है। योजना के तहत मजदूरी 300 रुपये से 409 रुपये प्रतिदिन के बीच है, जबकि सिक्किम में विशेष दर के तहत 450 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाती है। कमजोर मॉनसून की स्थिति में जरूरत पड़ने पर अधिक रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

इसके साथ ही सरकार जलाशयों के जलस्तर, बिजली उत्पादन पर संभावित प्रभाव और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से बिजली उपलब्ध कराने की तैयारियों पर भी लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार का उद्देश्य है कि यदि मॉनसून कमजोर रहता है तो कृषि, बिजली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर उसका असर न्यूनतम रखा जा सके।

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