Adani Group के लिए अमेरिका से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (US DoJ) ने कोर्ट में दाखिल नई फाइलिंग में अपने ही पुराने सिक्योरिटीज केस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विभाग ने कहा कि यह केस कई बड़ी कानूनी कमियों से भरा हुआ था और इसे या तो शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था या फिर एक साल पहले ही खत्म कर देना चाहिए था। DoJ का कहना है कि अगर मामला ट्रायल तक जाता तो सरकार की हार लगभग तय थी। यही वजह है कि अब सिक्योरिटीज चार्ज हटाने की मांग की गई है।
मामला क्या था?
अमेरिका में अडानी ग्रुप और उसके कुछ अधिकारियों पर सिक्योरिटीज कानूनों के उल्लंघन से जुड़े आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि कंपनी ने कुछ निवेशकों और फाइनेंशियल लेनदेन से जुड़ी जानकारी को लेकर गलत तरीके अपनाए। इन्हीं आरोपों के आधार पर अमेरिकी न्याय विभाग (US DoJ) ने आपराधिक मामला दर्ज किया था।
DoJ ने कहा- फैसला लेना बिल्कुल आसान था
नई फाइलिंग में अमेरिकी न्याय विभाग ने साफ कहा कि केस वापस लेने का फैसला “Not A Close Call” था। विभाग के मुताबिक इस मामले में इतने गंभीर कानूनी और सबूतों से जुड़े सवाल थे कि इसे आगे बढ़ाना सही नहीं था। DoJ ने माना कि शुरुआत में ही इस केस का आधार कमजोर था।
“नेम-एंड-शम” एक्सरसाइज बताया केस
DoJ ने अपनी ही पुरानी कार्रवाई को “Name-And-Shame” एक्सरसाइज बताया। यानी विभाग के मुताबिक ऐसा लगा कि केस मजबूत कानूनी आधार पर नहीं बल्कि केवल सार्वजनिक छवि खराब करने के लिए आगे बढ़ाया गया था। फाइलिंग में कहा गया कि आरोपों में कई कैटैस्ट्रॉफ़िक फ्लॉज़ थीं।DoJ ने माना कि इस मामले में सबूतों से जुड़ी कई बड़ी दिक्कतें थीं। विभाग का कहना है कि ट्रायल के दौरान इन कमियों के कारण सरकार का पक्ष कमजोर पड़ जाता और मेरिट के आधार पर हार की पूरी संभावना थी। इसलिए केस को आगे बढ़ाना सही फैसला नहीं माना गया।
DoJ का कहना है कि अगर इस मामले में कोई कार्रवाई बनती भी थी तो वह अधिकतम सिविल रिजॉल्यूशन तक सीमित हो सकती थी। वास्तविक वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। यह बात भी आपराधिक मुकदमे को कमजोर करने वाली प्रमुख वजहों में शामिल रही।
बाहरी निवेश या समझौते से इनकार
DoJ ने उन सभी दावों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि केस वापस लेने का फैसला किसी बाहरी निवेश, कारोबारी समझौते या अन्य कारणों से जुड़ा है। विभाग ने साफ कहा कि यह फैसला केवल कानूनी आधार और केस की कमजोरियों को देखते हुए लिया गया।
अडानी ग्रुप को मिली बड़ी राहत
इस घटनाक्रम से Adani Group को बड़ी कानूनी राहत मिली है। इससे कंपनी पर अमेरिका में चल रहे सिक्योरिटीज आरोपों का दबाव कम हो सकता है। साथ ही निवेशकों के बीच यह संदेश भी जाएगा कि DoJ ने खुद माना है कि आपराधिक मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त मजबूत आधार मौजूद नहीं था। हालांकि, बाजार की नजर अब आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया और किसी संभावित सिविल कार्रवाई पर भी बनी रहेगी।

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