मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुई सैन्य कार्रवाई के बाद ब्रेंट क्रूड ने तेज छलांग लगाई और 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
क्रूड ऑयल की कीमत कितनी बढ़ी?
सोमवार को ब्रेंट क्रूड का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 2.7% बढ़कर 90.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान इसमें करीब 4% तक की तेजी आई थी. जून के मध्य के बाद यह पहली बार है, जब ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार पहुंचा है.
अमेरिकी WTI क्रूड का अगस्त कॉन्ट्रैक्ट भी 2.4% चढ़कर 84.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
ईरान और अमेरिका में फिर क्या हुआ?
वीकेंड पर अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर नए हमले हुए. ईरान ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीजफायर प्रभावी रूप से टूट चुका है. इससे संघर्ष के और बढ़ने की आशंका बढ़ गई है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर लगातार नौवीं रात हमले किए. अमेरिका के अनुसार, इन हमलों का मकसद उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल व्यापारिक जहाजों और आम शिपिंग पर हमलों के लिए किया जा रहा है. कुवैत ने भी बताया कि उसने वीकेंड पर ईरानी ड्रोन को इंटरसेप्ट किया.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर इतनी चिंता क्यों?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त तेल शिपिंग रूट में शामिल है. यहां जहाजों की आवाजाही में बड़ी रुकावट आने पर दुनिया के कई देशों तक तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ईरान की नौसेना ने कहा कि उसने चार अज्ञात जहाजों को रोक दिया. ये जहाज चेतावनी के बावजूद उस रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जिसे ईरान ने असुरक्षित बताया. नौसेना के अनुसार, दो जहाज दुर्घटना के बाद रुक गए, जबकि बाकी दो वापस लौट गए. इसी बीच UK Maritime Trade Operations को सैन्य अधिकारियों से ओमान के कुमजार के उत्तर-पश्चिम में एक जहाज में आग लगने की सूचना मिली. हालांकि, आग लगने की वजह की पुष्टि नहीं हुई है.
क्या तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है?
पिछले एक हफ्ते में संघर्ष सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा. पुलों, बंदरगाहों, बिजली और ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं पर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. इससे सीजफायर की उम्मीद और कमजोर हुई है. कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने बताया कि शनिवार को ईरानी हमले में उसकी एक तेल सुविधा को नुकसान पहुंचा.
वीकेंड पर ईरान के जवाबी हमलों का मुख्य निशाना कुवैत रहा, जबकि बहरीन पर भी हमला हुआ. इजरायल ने सीरिया की सीमा के पास एक ईरानी ड्रोन को इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी. ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में क्यूशू द्वीप और दक्षिणी शहर शादेगान के आसपास के इलाकों पर भी हमला किया.
इस तनाव का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है. ईरान समर्थित हूती समूह पहले भी क्षेत्रीय तनाव के दौरान लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को प्रभावित कर चुका है. पिछले हफ्ते समूह के नेता ने सऊदी तेल ढांचे को निशाना बनाने की धमकी भी दी थी.
यही वजह है कि निवेशक अब तेल सप्लाई को लेकर ज्यादा चिंतित हैं. अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम रास्ते पर आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है. इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल और दूसरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है.

Related Posts
मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किए जा सकते हैं सोनम वांगचुक
NEET पेपर लीक को पीएम मोदी ने बताया ‘घोर पाप’, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान : 20 फीसदी से आगे फिलहाल कोई फैसला नहीं