August 6, 2026

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वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर में नई चुनौती : भारत में सही निवेश सलाह देने वाले एक्सपर्ट्स की भारी कमी

उड़ान डेस्क। भारत में अल्ट्रा-रिच निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उन्हें सही निवेश सलाह देने वाले अनुभवी वेल्थ रिलेशनशिप मैनेजर्स (RM) उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहे हैं। यही वजह है कि देश का वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर अब एक नई चुनौती का सामना कर रहा है। पिछले पांच सालों में 3 करोड़ डॉलर (30 मिलियन डॉलर) या उससे ज्यादा की वेल्थ वाले भारतीयों की संख्या 63% बढ़कर 19,877 हो गई, जबकि FY25 में ऐसे ग्राहकों को संभालने के लिए देश में केवल करीब 1,900 डेडिकेटेड वेल्थ रिलेशनशिप मैनेजर ही मौजूद थे।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) तक डेडिकेटेड वेल्थ रिलेशनशिप मैनेजर्स की संख्या बढ़कर करीब 2,800 होने का अनुमान है। हालांकि, अल्ट्रा-रिच निवेशकों की तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए यह बढ़ोतरी भी पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। यानी आने वाले सालों में भी अनुभवी सलाहकारों की कमी बनी रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, हर रिलेशनशिप मैनेजर के जिम्मे आने वाली औएवरेज एसेट्स भी लगातार बढ़ने वाली है। यह आंकड़ा 3.7 बिलियन रुपए (₹3.7 बिलियन) से बढ़कर 4.8 बिलियन रुपए (₹4.8 बिलियन) तक पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब है कि हर मैनेजर को पहले के मुकाबले ज्यादा वेल्थ और अधिक हाई-नेटवर्थ ग्राहकों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ेगी।

अब ग्राहकों से ज्यादा अनुभवी सलाहकारों की है जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि वेल्थ मैनेजमेंट इंडस्ट्री के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नए ग्राहक ढूंढना नहीं, बल्कि एक्सपीरियंस इन्वेस्टमेंट एडवाइजर उपलब्ध कराना है। बैंक, प्राइवेट इक्विटी-बैक्ड प्लेटफॉर्म्स और वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़ी एक्सपर्ट कंपनियां अनुभवी रिलेशनशिप मैनेजर्स को अपने साथ जोड़ने के लिए लगातार कॉम्पिटिशन कर रही हैं।

हायरिंग बढ़ी, सैलरी और बोनस भी हुए अट्रैक्टिव
अनुभवी सलाहकारों की मांग बढ़ने से कंपनियों के बीच लेटरल हायरिंग तेज हो गई है। इसके साथ ही बेहतर टैलेंट को अट्रैक्ट करने के लिए सैलरी में बढ़ोतरी और जॉइनिंग बोनस जैसे ऑफर भी दिए जा रहे हैं। वहीं, कंपनियों के अंदर नए रिलेशनशिप मैनेजर्स को तैयार करने में भी काफी समय लगता है। रिपोर्ट के मुताबिक, किसी नए सलाहकार को पूरी तरह सक्षम बनने में 18 से 24 महीने का समय लग जाता है।

अल्ट्रा-रिच ग्राहकों के लिए सबसे ज्यादा है अनुभवी सलाहकारों की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा कमी अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स ( Ultra HNI ) को संभालने वाले अनुभवी सलाहकारों की है। इस तरह के ग्राहक सिर्फ निवेश की सलाह नहीं, बल्कि लंबे समय से बने भरोसेमंद रिश्तों को भी महत्व देते हैं। ऐसे सलाहकारों को तैयार करना आसान नहीं होता। यही वजह है कि वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियां अनुभवी रिलेशनशिप मैनेजर्स को अपनी ओर अट्रैक्ट करने के लिए 20% से 40% तक ज्यादा सैलरी, कई सालों के गारंटीड बोनस और साइनिंग इंसेंटिव जैसे ऑफर दे रही हैं।

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कंपनियां अपने सलाहकारों की काम करने की क्षमता नहीं बढ़ा पाईं, तो तेजी से बढ़ रहा वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार उनकी कमाई से ज्यादा खर्च बढ़ा सकता है। अभी भी लिस्टेड वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियों के लिए कर्मचारियों पर होने वाला खर्च सबसे बड़ा ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज है। ऐसे में अनुभवी कर्मचारियों को बनाए रखना, नए सलाहकार तैयार करना और ज्यादा वेल्थ के साथ लागत को संतुलित रखना कंपनियों के लिए बेहद अहम होगा।

भारत में तेजी से बढ़ रही है अल्ट्रा-रिच लोगों की संख्या
भारत में अमीर लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नाइट फ्रैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 3 करोड़ डॉलर (30 मिलियन डॉलर) या उससे ज्यादा की वेल्थ रखने वाले भारतीयों की संख्या 2021 में 12,161 थी, जो 2026 में बढ़कर 19,877 हो गई। इसके साथ ही दुनिया के टोटल अल्ट्रा-रिच लोगों में भारत की हिस्सेदारी 2.2% से बढ़कर 2.8% हो गई है। अनुमान है कि 2031 तक यह संख्या 25,217 तक पहुंच जाएगी।

मुंबई में रहते हैं सबसे ज्यादा अल्ट्रा-रिच भारतीय
देश के टोटल अल्ट्रा-रिच लोगों में 35.4% अकेले मुंबई में रहते हैं। वहीं, भारत में अरबपतियों की संख्या भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। यह 2026 में 207 से बढ़कर 2031 तक 313 हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो भारत दुनिया के 10 सबसे तेजी से बढ़ने वाले अरबपति बाजारों में शामिल हो जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की टोटल एसेट्स का सिर्फ करीब 15% हिस्सा ही प्रोफेशनल तरीके से मैनेज किया जाता है। तुलना करें तो अमेरिका में यह आंकड़ा 75% है। वहीं, भारत के टोटल एसेट्स में फाइनेंशियल एसेट्स की हिस्सेदारी 25% है, जबकि अमेरिका में यह 70% है। डेलॉइट के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के 35% से 40% संपन्न परिवार अपनी संपत्ति खुद मैनेज कर रहे थे या फिर अनौपचारिक तरीके से उसका मैनेजमेंट कर रहे थे। यानी बड़ी संख्या में लोग अब भी प्रोफेशनल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की सर्विस नहीं ले रहे हैं।

हालांकि, प्रोफेशनल वेल्थ मैनेजमेंट की पहुंच अभी सीमित है, लेकिन अमीर निवेशकों के लिए तैयार किए गए इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के तहत मैनेजमेंट वाली वेल्थ 2021 के 23.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर मार्च 2026 तक 41.4 लाख करोड़ रुपए हो गई। वहीं, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) में इन्वेस्टमेंट कमिटमेंट 1.8 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 7 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच गई।

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