August 6, 2026

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व्हीलचेर भी नहीं रोक सकी हौसलों की उड़ान : दिव्यांगों के लिए मिसाल हैं विनयाना

Udaan Desk. जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें हों, अपने सपनों को कभी मरने नहीं देना चाहिए. जन्म से व्हीलचेयर पर बैठी विनयाना खुराना इस बात में विश्वास रखती हैं. जन्म से सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) से जूझ रहीं विनयाना व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन उन्होंने अपनी पहचान कभी अपनी दिव्यांगता से नहीं बनने दी. आज वह इंग्लिश लिटेरेचर की टीचर, रिसर्चर, राइटर, मोटिवेशनल स्पीकर और कंटेंट क्रिएटर के रूप में जानी जाती हैं. विनयाना दिव्यांग लोगों के लिए उदाहरण बन चुकी हैं और उन्हें मोटिवेट करती हैं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई
प्रभात खबर की खबर के अनुसार, विनयाना हमेशा से पढ़ाई करके अपनी पहचान बनाना चाहती थीं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के विवेकानंद कॉलेज से इंग्लिश में ग्रेजुएशन की डिग्री ली. वे हमेशा से साहित्य पढ़ना चाहती थीं. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने डीयू से ही पोस्ट ग्रेजुएशन किया. पोस्ट ग्रेजुएशन में उनके रिसर्च का विषय समावेशी शिक्षा था, जिसमें उन्होंने दिव्यांग और सामान्य छात्रों पर इसके प्रभाव का अध्ययन किया.

माता-पिता और परिवार वालों ने हर कदम पर किया मोटिवेट
विनयाना के अनुसार, उनके माता-पिता ने कभी उनकी दिव्यांगता को उनकी पहचान नहीं बनने दिया. उन्होंने हमेशा विनयाना को अपने फैसले खुद लेने, आत्मनिर्भर बनने और बड़े सपने देखने के लिए मोटिवेट किया. उनके भाई विशेष ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया. परिवार का यही भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत बना.

सोशल मीडिया के जरिए लोगों को करती हैं जागरुक
सोशल मीडिया से बदली हजारों लोगों की सोच इंस्टाग्राम पर विनयाना के 90 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. वे सोशल मीडिया पर दिव्यांगता से जुड़े मिथकों को तोड़ने का काम कर रही हैं. वो दिव्यांग लोगों के लिए कॉन्टेंट बनाती हैं और सोसाइटी का माइंडसेट बदलने की हर दिन कोशिश करती हैं. अब तक वह 10 हजार से अधिक दिव्यांग लोगों और उनके परिवारों का मार्गदर्शन भी कर चुकी हैं.

विनयाना लिख चुकी हैं कई किताब
विनयाना कविता संग्रह, लघुकथा ई-बुक और दिव्यांगता पर आधारित कॉमिक स्ट्रिप्स भी लिख चुकी हैं. उनके लेख और विचार BBC हिंदी, Youth Ki Awaaz, Love Matters India समेत कई प्रमुख मंचों पर प्रकाशित हो चुके हैं.

कई कार्यक्रम में हो चुकी हैं सम्मानित
राष्ट्रपति से मिला निमंत्रण, कई राष्ट्रीय सम्मान किए अपने नाम विनयाना को दिव्यांग अधिकारों और सामाजिक बदलाव के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं. उन्हें दो बार टाटा सबल वर्डस्मिथ अवॉर्ड मिला. REX कर्मवीर चक्र अवॉर्ड, कैविनकेयर एबिलिटी मास्टरी अवॉर्ड, डिजिटल वुमेन अवॉर्ड, स्वयं सिद्धा अवॉर्ड और D-30 Disability Impact List 2026 में भी उन्हें जगह मिली.

उनके योगदान को देखते हुए गणतंत्र दिवस 2025 पर भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें ‘At Home Reception’ में विशेष रूप से आमंत्रित किया. वर्ष 2026 में दक्षिण-पूर्व दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट ने भी शिक्षा और दिव्यांग सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया.

विनयाना ने दिया सफलता का मंत्र
विनयाना ने उन लोगों को खास संदेश दिया जो किसी शरीरिक परेशानी से लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा अपनी तुलना किसी और से नहीं करें. सभी के लिए सक्सेस का मतलब अलग है. अपने ऊपर काम करें और खुद को समय दें. अपनी हर छोटी-बड़ी सफलता का जश्न मनाएं.

विनयाना का मानना है कि सफलता का मतलब केवल पुरस्कार या पद हासिल करना नहीं है. वह कहती हैं, “यह मत पूछिए कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ.यह सोचिए कि जो मेरे पास है, उससे मैं क्या कर सकती हूं.” उनका मानना है कि परिस्थितियां इंसान के सपनों की सीमा तय नहीं करतीं, बल्कि उसका नजरिया और मेहनत सफलता का रास्ता बनाते हैं.

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