Udaan Desk. देश में खरीफ फसलों की बोआई का कुल रकबा अब पिछले साल के मुकाबले अभी भी काफी पीछे है। हालांकि, पिछले कुछ सप्ताह में खरीफ फसलों के रकबे में लगातार सुधार देखने को मिला है। अब रकबे में कमी 2 फीसदी से भी कम रह गई है। हालांकि, सीजन की सबसे प्रमुख फसल धान की रोपाई चिंता का विषय बनती जा रही है। धान का रकबा 4.2 प्रतिशत घटकर 344.78 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 360.67 लाख हेक्टेयर था। धान की कम रोपाई के कारण इस साल चावल का उत्पादन कम होने की आशंका जताई जा रही है।
खरीफ फसलों की बोआई में सुधार
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन में 7 अगस्त तक खरीफ फसलों की कुल बोआई 967.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 985.89 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल बोआई 1.8 प्रतिशत कम है। यह सीजन के सामान्य रकबे 1,104.46 लाख हेक्टेयर का 87.6 प्रतिशत है।
1 से 7 अगस्त के बीच किसानों ने करीब 74 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोआई की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 65.17 लाख हेक्टेयर में बोआई हुई थी। इससे कुल कमी 31 जुलाई के करीब 3 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत से भी कम हो गई है।
धान की कमजोर रोपाई
खरीफ की मुख्य अनाज फसल धान का रकबा 4.2 प्रतिशत घटकर 344.78 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 360.67 लाख हेक्टेयर था। 31 जुलाई तक धान के रकबे में कमी 2.2 प्रतिशत थी। पिछले सप्ताह कमी बढ़ने से धान की रोपाई की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है। पिछले खरीफ सीजन में धान का कुल रकबा 446.70 लाख हेक्टेयर था, जबकि खरीफ सीजन के दौरान धान का औसत रोपाई क्षेत्र 412 लाख हेक्टेयर आंका गया है। पिछले साल की समीक्षाधीन अवधि की तुलना में अभी भी धान की रोपाई 15.90 लाख हेक्टेयर कम है।
प्रमुख राज्यों में कम हुई धान की रोपाई
धान की खेती के रकबे में मुख्य कमी मध्य प्रदेश में 5.14 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 3.42 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 2.34 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 2.32 लाख हेक्टेयर, ओडिशा में 1.36 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1.19 लाख हेक्टेयर, पश्चिम बंगाल में 0.99 लाख हेक्टेयर, बिहार में 0.97 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 0.97 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 0.86 लाख हेक्टेयर की रही है।
हालांकि, तेलंगाना में 1.00 लाख हेक्टेयर, असम में 4.40 लाख हेक्टेयर, उत्तराखंड में 0.35 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 0.03 लाख हेक्टेयर और पंजाब में 0.17 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी देखी गई है।
चावल उत्पादन कम होने की आशंका
सरकार ने खरीफ 2026 में 1,231.5 लाख टन चावल उत्पादन का लक्ष्य रखा है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में रकबा कम होने के कारण उत्पादन में बड़ी कमी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि अगस्त के दौरान हुई बोआई से रकबे की कमी कम हुई है और महीने के अंत तक बोआई का समय बाकी होने के कारण रकबा और बढ़ने की संभावना है।
कम बारिश ने बिगाड़ दिया फसलों का गणित
फसलों का रकबा कम होने की मुख्य वजह कम बारिश है। 1 जून से 10 अगस्त तक देश में कुल बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 741 में से 345 जिलों में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक कम रही है। 1 से 10 अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से 9 प्रतिशत कम रही। इसके बावजूद अगस्त के दौरान हुई बोआई से रकबे की कमी कम हुई है और महीने के अंत तक बोआई का समय बाकी होने के कारण रकबा और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
अल नीनो की चावल पर चोट
भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार और फिलीपींस जैसे प्रमुख चावल उत्पादक देशों पर मौसम की अनिश्चितता का असर पड़ सकता है। मजबूत अल नीनो, खेती की बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक तनाव के चलते 2026-27 के विपणन वर्ष में दुनिया का चावल उत्पादन घटने का अनुमान है।
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, वैश्विक चावल उत्पादन करीब 90 लाख मीट्रिक टन घटकर 5,364 लाख मीट्रिक टन रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर चावल की उपलब्धता, व्यापार और कीमतों पर पड़ने की आशंका है।

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