September 3, 2026

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन : रिजर्वेशन के विरोध में उमड़ी हजारों की भीड़

नईदिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को आरक्षण सुधार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी नियमों के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे. प्रदर्शन का आयोजन ‘रिजर्वेशन रिफॉर्म आंदोलन’ के बैनर तले किया गया, जिसका नेतृत्व NEET अभ्यर्थी हर्ष दुबे ने किया. राजस्थान की जेनरल सेना और चाणक्य सेना के साथ करणी सेना भी प्रदर्शन में शामिल हुई. इस दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अजीत भारती भी मौके पर मौजूद रहे.

आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग
प्रदर्शनकारियों ने जाति के आधार पर मिलने वाले आरक्षण में सुधार की मांग की. कई प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आरक्षण का लाभ आर्थिक स्थिति के आधार पर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए. प्रदर्शन के दौरान UGC के अब स्थगित किए जा चुके इक्विटी नियमों के खिलाफ भी नारे लगाए गए.

कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST एक्ट को लेकर भी आपत्ति जताई और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठाने की मांग की. उनका कहना था कि कानून का इस्तेमाल किसी के खिलाफ गलत तरीके से नहीं होना चाहिए.

हनुमान चालीसा का पाठ, लगाए नारे
प्रदर्शन स्थल से सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी हनुमान चालीसा का पाठ करते और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के नारे लगाते दिखाई दिए. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे.

हालांकि, भीड़ की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है. कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि प्रदर्शन में हजारों लोग पहुंचे.

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर असमंजस
प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर अनुमति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं रही. दिल्ली पुलिस की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना में कहा गया था कि रिजर्वेसन हटाओ आंदोलन के पदाधिकारियों को आधिकारिक माध्यम से जानकारी दी गई थी और सभी से कानून के निर्देशों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण रहने को कहा गया था.

वहीं, आयोजक जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने पर अड़े रहे. आयोजक हर्ष दुबे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल होने पहुंच रहे लोगों को बाहर रोका जा रहा था. उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस के साथ कई घंटे बातचीत के बाद प्रदर्शन को रामलीला मैदान ले जाने के लिए कहा गया.

PM मोदी को ज्ञापन सौंपने तक धरने का दावा
हर्ष दुबे ने कहा कि प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपने तक मौके पर रहेंगे. उन्होंने कहा कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था में ऐसा सुधार करना है, जिससे इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे.
रिजर्वेशन हटाओ मिशन से जुड़े प्रतीक पांडे ने भी आरक्षण को आर्थिक आधार पर देने की मांग की. उन्होंने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग प्रदर्शन में शामिल होने आए और कई लोगों को रास्ते में रोका या दूसरी जगह भेजा गया.

भारी सुरक्षा के बीच प्रदर्शन
प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. दिल्ली पुलिस के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों की तैनाती की गई. इलाके में बैरिकेडिंग भी की गई.

प्रदर्शन पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
आरक्षण सुधार को लेकर चल रहे विवाद पर लेखक और टिप्पणीकार आनंद रंगनाथन ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सवाल उठाया और दो अलग-अलग प्रदर्शनों के साथ कथित तौर पर अलग व्यवहार का आरोप लगाया.

उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए Aarin Capital के चेयरपर्सन और Infosys के पूर्व CFO मोहनदास पई ने इसे गलत बताया. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए कहा कि कानून का पालन करने वाले नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए जुटे हैं.

यह प्रदर्शन हर्ष दुबे के नेतृत्व में पिछले कई सप्ताह से चल रहे ऑनलाइन अभियान के बाद हुआ. आरक्षण सुधार और UGC के इक्विटी नियमों के विरोध का यह अभियान अब सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुका है. नागपुर, लखनऊ, जयपुर और विशाखापत्तनम में भी ऐसे प्रदर्शन किए जा चुके हैं.

राजस्थान में राजपूत करणी सेना ने UGC इक्विटी रेगुलेशन के विरोध में 24 दिन तक करीब 800 किलोमीटर की यात्रा कर जयपुर में प्रदर्शन किया था. वहां बैरिकेड तोड़ने के आरोपों के बाद पुलिस से झड़प भी हुई थी.

जंतर-मंतर पर शुक्रवार के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बढ़ाया जाएगा.

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