September 2, 2026

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चीनी की कीमतों में तेजी : सरकार ने बताए कारण, जानें क्या है वजह?

उड़ान डेस्क। चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। सिर्फ एक महीने में चीनी करीब 16% महंगी हो गई है। 20 जुलाई को देशभर में चीनी की एवरेज रिटेल प्राइस 48.18 रुपए प्रति किलो थी। 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपए प्रति किलो हो गई। इसके बाद सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है। इसके साथ ही, त्योहारी सीजन से पहले चीनी के स्टॉक पर भी नियंत्रण सख्त कर दिया गया है।

चीनी की कीमत बढ़ने की क्या वजह है?
सरकार के मुताबिक, चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। इनमें घरेलू उत्पादन का उम्मीद से कम रहना, त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ना, मौसम की वजह से फसल को नुकसान और दुनियाभर में चीनी की सप्लाई कम होना शामिल है। इसके अलावा, इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में चीनी की जमाखोरी और कीमत बढ़ने की अटकलों को भी सरकार ने इसकी एक वजह बताया है।

इथेनॉल के लिए ज्यादा चीनी इस्तेमाल होने की बात खारिज
सरकार ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि इथेनॉल बनाने के लिए ज्यादा चीनी का इस्तेमाल होने की वजह से कीमतें बढ़ी हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 के करीब 12% से घटकर 2025-26 में करीब 9% रह गई है। वहीं, भारत में बनने वाले इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है। इसलिए सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का ज्यादा इस्तेमाल मुख्य वजह नहीं है।

फसल को बीमारी और ज्यादा बारिश से नुकसान
मौजूदा चीनी सीजन में देश में करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। यह गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती 343 LMT के अनुमान से करीब 11% कम है। यानी इस सीजन में उम्मीद के मुकाबले करीब 37 LMT कम चीनी बनने का अनुमान है। मंत्रालय के मुताबिक, चीनी उत्पादन कम रहने की एक वजह गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी का असर है। इसके अलावा, ज्यादा बारिश की वजह से खेतों में पानी भरने से भी गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। इन कारणों से इस सीजन में चीनी का उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहने की उम्मीद है।

अक्टूबर तक देश में चीनी की कमी नहीं होगी
उत्पादन कम रहने के बावजूद सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है। इससे अक्टूबर में नया गन्ना पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू खपत की जरूरत पूरी की जा सकती है। मंत्रालय के मुताबिक, भारत में आमतौर पर हर साल 320-340 LMT चीनी का उत्पादन होता है, जबकि देश में सालाना खपत करीब 280-290 LMT है। यानी सामान्य स्थिति में भारत अपनी घरेलू जरूरत से ज्यादा चीनी का उत्पादन करता है। चीनी की सप्लाई को लेकर सरकार के लेटेस्ट कदम ऐसे समय आए हैं, जब इस साल की शुरुआत में उसने चीनी के एक्सपोर्ट की अनुमति बढ़ाई थी। फरवरी में 2025-26 चीनी सीजन के लिए अतिरिक्त 5 LMT चीनी एक्सपोर्ट करने की अनुमति दी गई थी। इससे पहले नवंबर 2025 में 15 LMT चीनी एक्सपोर्ट की अनुमति दी गई थी। उस समय सरकार ने देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध होने की बात कही थी।

चीनी के स्टॉक पर सरकार की सख्ती
सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी तय की है। 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी कारोबारियों को अधिकतम 400 टन चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति है। सरकार ने जुलाई में यह नियम लागू करने का ऐलान किया था। उसका कहना था कि कुछ जगहों पर जमाखोरी, कीमत बढ़ने की उम्मीद में खरीदारी और कागजों पर होने वाले कारोबार की वजह से चीनी की मिल और रिटेल कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ रहा है।

15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे थोक खरीदार
1 सितंबर से थोक में चीनी खरीदने वाले ग्राहक 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यानी बड़े खरीदारों को अपनी जरूरत के हिसाब से ही चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति होगी। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में मौजूद स्टॉक की जांच भी कर रही हैं। इसके लिए अधिकारियों की टीमें मिलों में जाकर वास्तविक स्टॉक का सत्यापन कर रही हैं।

अक्टूबर से बढ़ सकता है चीनी का उत्पादन
सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी है। सरकार को उम्मीद है कि इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन बढ़कर 10 LMT से ज्यादा हो सकता है। आमतौर पर अक्टूबर में करीब 3-4 LMT चीनी का उत्पादन होता है। ऐसे में इस बार पेराई जल्दी शुरू होने से शुरुआती महीनों में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

दुनियाभर में भी चीनी की सप्लाई कम
चीनी की कीमतों पर दबाव सिर्फ भारत में ही नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, 2026-27 में दुनियाभर में करीब 33 LMT चीनी की कमी रहने का अनुमान है। यानी वैश्विक स्तर पर भी मांग के मुकाबले चीनी की सप्लाई कम रहने की आशंका है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी दिखा है। सरकार के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में इसमें 16% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

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