September 2, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

MSME के लिए भुगतान की समय सीमा तय, अब बिक्री के बाद पेमेंट का इंतजार होगा कम

Udaan Desk. छोटे कारोबारियों के लिए सामान बेच देना कारोबार का आखिरी कदम नहीं होता। असली परेशानी कई बार तब शुरू होती है, जब बिक्री के बाद भुगतान लंबे समय तक अटका रहता है। पैसा फंसने से रोजमर्रा का कारोबार, कर्मचारियों की सैलरी और अगली खरीद तक प्रभावित होती है। सरकार ने इसी समस्या को देखते हुए MSME Development (Amendment) Act, 2026 में भुगतान और विवाद निपटाने की व्यवस्था को मजबूत किया है।

अटके भुगतान के मामलों में अब समय सीमा तय
नए कानून में छोटे और सूक्ष्म कारोबारियों के भुगतान से जुड़े विवादों को जल्दी निपटाने के लिए समय सीमा तय की गई है। मध्यस्थता की प्रक्रिया पहली पेशी की तारीख से 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। अगर मध्यस्थता से मामला नहीं सुलझता है तो उसे 30 दिनों के भीतर पंचाट के लिए भेजना होगा। इसके बाद दलीलें पूरी होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर फैसला देने का प्रावधान है। यानी भुगतान को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद मामला लंबे समय तक न चले, इसके लिए पूरी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों पर समय सीमा तय की गई है।

ऑनलाइन ही निपट सकता है विवाद
संशोधन में ऑनलाइन विवाद समाधान की व्यवस्था भी जोड़ी गई है। इसका मकसद छोटे कारोबारियों को भुगतान से जुड़े विवादों का समाधान कम समय और कम खर्च में दिलाना है। छोटे कारोबारियों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि भुगतान का विवाद होने पर हर मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने की कोशिश की गई है।

6 महीने से ज्यादा मामला अटका तो 50% रकम का प्रावधान
नए प्रावधान में एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। अगर किसी सूक्ष्म या लघु उद्यम के पक्ष में रकम देने का फैसला हो चुका है और उस फैसले को रद्द कराने की अर्जी 6 महीने से ज्यादा समय से लंबित है, तो अदालत को कम से कम 50% तय रकम का भुगतान करने का आदेश देना होगा। यह प्रावधान उन छोटे कारोबारियों के लिए अहम है जिनकी रकम विवाद के कारण लंबे समय तक फंसी रहती है।

केंद्रीय सरकारी कंपनियों से भुगतान TReDS के जरिए
सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों यानी CPSEs से MSME की खरीद के बिलों के निपटान के लिए TReDS का रास्ता अनिवार्य किया है। इसके तहत MSME से खरीदे गए सामान और सेवाओं के बिलों का निपटान TReDS के जरिए किया जाएगा। TReDS ऐसा मंच है जहां MSME अपने बकाया बिलों को वित्तीय संस्थानों के जरिए भुगतान में बदल सकते हैं। इससे कारोबारी को खरीदार से भुगतान मिलने तक लंबा इंतजार करने के बजाय अपने कारोबार में पैसे का इस्तेमाल जल्दी करने का रास्ता मिलता है।

TReDS पर तेजी से बढ़ा कारोबार
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक TReDS पर बिलों के वित्तपोषण का कारोबार 2022-23 में 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। सरकार का कहना है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए इसके इस्तेमाल को जरूरी बनाने से MSME के भुगतान से जुड़ी दिक्कतें और कम हो सकती हैं।

राज्यों को भी सार्वजनिक कंपनियों के लिए रास्ता मिलेगा
नए प्रावधानों में राज्यों के लिए भी अपनी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को TReDS के जरिए MSME के बिलों का निपटान करने के लिए प्रोत्साहित करने का रास्ता रखा गया है। यानी यह व्यवस्था केवल केंद्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगी।

भुगतान विवाद के लिए ज्यादा सुविधा केंद्र बन सकेंगे
सरकार ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC) की व्यवस्था में भी बदलाव किया है। राज्यों को एक से ज्यादा MSEFC बनाने की सुविधा दी गई है, ताकि भुगतान से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से किया जा सके। अगस्त 2026 तक देश में 161 MSEFC स्थापित किए जा चुके हैं। इन परिषदों का काम सूक्ष्म और लघु उद्यमों के भुगतान में देरी से जुड़े विवादों को निपटाना है।

बकाया रकम की वसूली का रास्ता भी मजबूत
अगर सुविधा परिषद, मध्यस्थता या पंचाट के जरिए भुगतान का फैसला हो जाता है तो नए कानून के तहत उस फैसले से तय रकम की वसूली भूमि राजस्व के बकाये की तरह की जा सकती है। इसके लिए संबंधित जिले के कलेक्टर, उपायुक्त या सरकार की ओर से तय अधिकारी के जरिए वसूली का प्रावधान है।

9.16 करोड़ MSME रजिस्टर्ड
सरकार के मुताबिक अगस्त 2026 तक उद्यम पोर्टल पर 9.16 करोड़ MSME पंजीकृत थे और ये उद्यम 40 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे थे। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार MSME क्षेत्र का देश की GDP में 31.1%, विनिर्माण उत्पादन में 35.4% और निर्यात में 48.58% हिस्सा है।

क्या अब हर अटका पैसा तुरंत मिल जाएगा?
ऐसा कहना सही नहीं होगा। नए कानून में भुगतान विवाद को जल्दी निपटाने के लिए समय सीमा, ऑनलाइन विवाद समाधान, TReDS और रकम की वसूली के मजबूत प्रावधान किए गए हैं। लेकिन किसी कारोबारी का भुगतान कब मिलेगा, यह संबंधित खरीद, विवाद और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए इसे हर अटके भुगतान के तुरंत मिलने की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

Spread the love