Udaan Desk. ऑफिस में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। कंपनियां अब लंबे समय के लिए बड़ा ऑफिस किराये पर लेने के बजाय जरूरत के हिसाब से तैयार ऑफिस और को-वर्किंग स्पेस लेना ज्यादा पसंद कर रही हैं। यही वजह है कि देश के बड़े शहरों में को-वर्किंग स्पेस की मांग तेजी से बढ़ी है।
रियल एस्टेट सलाहकार कुशमैन एंड वेकफील्ड के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से जून के बीच देश के 8 बड़े शहरों में कंपनियों ने को-वर्किंग ऑपरेटरों से 1.91 लाख से ज्यादा सीटें लीज पर लीं। पिछले साल इसी दौरान यह आंकड़ा करीब 1.14 लाख सीटों का था। यानी एक साल में सीटों की लीजिंग करीब 68 फीसदी बढ़ गई।
क्यों बढ़ रही को-वर्किंग स्पेस की मांग?
कंपनियां अब ऐसे ऑफिस चाहती हैं, जहां उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से जगह बढ़ाने या घटाने की सुविधा मिले। को-वर्किंग और मैनेज्ड ऑफिस में कंपनियों को पहले से तैयार जगह मिल जाती है। इससे उन्हें खुद पूरा ऑफिस तैयार करने और उसके रखरखाव पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता। कुशमैन एंड वेकफील्ड का कहना है कि इसी वजह से कंपनियां तेजी से फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की तरफ बढ़ रही हैं।
बेंगलुरु में सबसे ज्यादा सीटें लीज पर
शहरों की बात करें तो बेंगलुरु इस मामले में सबसे आगे रहा। जनवरी से जून 2026 के बीच यहां को-वर्किंग ऑपरेटरों ने 57,487 सीटें लीज पर दीं। पिछले साल इसी दौरान यह आंकड़ा 43,616 सीटों का था। यानी एक साल में करीब 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
हैदराबाद में रफ्तार इससे भी तेज रही। यहां इस साल के पहले छह महीनों में 40,451 सीटें लीज पर दी गईं। पिछले साल इसी दौरान केवल 14,936 सीटें लीज पर गई थीं। यानी मांग एक साल में दोगुने से भी ज्यादा हो गई।
मुंबई में भी को-वर्किंग स्पेस की मांग तेजी से बढ़ी। जनवरी से जून के बीच यहां 25,820 सीटें लीज पर दी गईं, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह आंकड़ा 11,226 सीटों का था।
को-वर्किंग कंपनियों ने 84 लाख वर्ग फुट ऑफिस लिया किराये पर
बढ़ती मांग को देखते हुए को-वर्किंग कंपनियां अपने सेंटर भी तेजी से बढ़ा रही हैं। जनवरी से जून 2026 के दौरान इन कंपनियों ने नए सेंटर खोलने के लिए करीब 84 लाख वर्ग फुट ऑफिस स्पेस किराये पर लिया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 54 लाख वर्ग फुट था। यानी एक साल में को-वर्किंग कंपनियों की तरफ से ऑफिस स्पेस लेने में करीब 55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
कंपनियों की पसंद क्यों बदल रही है?
कुशमैन एंड वेकफील्ड में बेंगलुरु की कार्यकारी प्रबंध निदेशक और भारत में फ्लेक्स कारोबार की प्रमुख रमीता अरोड़ा के मुताबिक, फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस अब कंपनियों की ऑफिस रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। उनका कहना है कि कंपनियां अपने खर्च और जरूरत के हिसाब से ज्यादा आसानी से बदलाव करना चाहती हैं। इसी वजह से फ्लेक्स और मैनेज्ड ऑफिस लंबे समय की योजना का हिस्सा बन रहे हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भी इस तरह के ऑफिस की मांग बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
कुल ऑफिस लीजिंग में करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी
बीहाइव वर्कस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य विकास अधिकारी अरुण नारायण के मुताबिक, कुछ साल पहले तक देश में कुल कमर्शियल ऑफिस लीजिंग में फ्लेक्सिबल ऑफिस की हिस्सेदारी काफी कम थी। अब यह बढ़कर सालाना कमर्शियल लीजिंग का करीब 20 फीसदी हो गई है। उनके मुताबिक, इस साल के पहले छह महीनों में करीब 70 फीसदी ज्यादा को-वर्किंग सीटों का लीज पर जाना साफ दिखाता है कि कंपनियों के बीच तैयार और जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किए जा सकने वाले ऑफिस की मांग तेजी से बढ़ रही है।

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