Udaan Desk. विदेश में अपना सामान बेचने की चाह रखने वाले छोटे कारोबारियों और MSME के लिए एक्सपोर्ट का रास्ता अब पहले से आसान हो सकता है। सरकार ने इन्वेंट्री आधारित सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात के लिए नया ढांचा लागू किया है। इसमें कारोबारियों को विदेश भेजे जाने वाले सामान की कागजी कार्रवाई, कस्टम प्रक्रिया और लॉजिस्टिक्स जैसी कई जिम्मेदारियां खुद संभालने की जरूरत नहीं होगी। इन कामों की जिम्मेदारी रजिस्टर्ड Exporter-on-Record (EOR) संभालेगा।
सरकार ने यह ढांचा 5 अगस्त 2026 को अधिसूचना और सार्वजनिक सूचना के जरिए लागू किया है। इसका मकसद भारत में बने या तैयार किए गए सामान के सीमा-पार ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देना है।
EOR क्या करेगा?
नए ढांचे में EOR एक पंजीकृत निर्यातक के तौर पर काम करेगा। विदेश से पक्का ऑर्डर मिलने के बाद EOR भारतीय Seller-on-Record (SOR) से सामान खरीदेगा और उसे अपने नाम से विदेश भेजेगा। यानी भारतीय कारोबारी का सामान विदेशी ग्राहक तक पहुंचाने की निर्यात प्रक्रिया में EOR एक महत्वपूर्ण कड़ी होगा।
कागजी कार्रवाई का बोझ होगा कम
विदेश में सामान बेचते समय कारोबारियों के सामने सिर्फ ग्राहक ढूंढने की चुनौती नहीं होती। निर्यात दस्तावेज, कस्टम प्रक्रिया, विदेशी बाजार के नियम और उत्पाद से जुड़ी मंजूरियां भी कारोबार का हिस्सा होती हैं। नए ढांचे में EOR इन कामों की जिम्मेदारी ले सकेगा। इसमें निर्यात दस्तावेज, कस्टम औपचारिकताएं और गंतव्य देश के नियामकीय नियमों का पालन शामिल है।
पैकेजिंग से लेकर डिलीवरी तक जिम्मेदारी
EOR की भूमिका सिर्फ सामान को विदेश भेजने तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार के मुताबिक EOR उत्पाद परीक्षण और प्रमाणन, पैकेजिंग, लेबलिंग, ऑर्डर पूरा करने की प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स और रिवर्स लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी भी संभाल सकता है। यानी छोटे कारोबारी के लिए विदेशी बाजार में बिक्री का सबसे मुश्किल हिस्सा काफी हद तक एक संगठित निर्यात व्यवस्था के जरिए संभाला जा सकेगा।
पहले विदेशी ग्राहक, फिर सामान की खरीद
नए ढांचे में एक अहम सुरक्षा प्रावधान भी है। निर्यात के लिए सामान की खरीद पक्के विदेशी ऑर्डर के आधार पर ही की जा सकेगी। इसका मतलब यह है कि सिर्फ अनुमान के आधार पर विदेश भेजने के लिए सामान का बड़ा स्टॉक तैयार करने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने निर्यात के लिए सट्टा आधारित इन्वेंट्री तैयार करने पर रोक लगा रखी है।
सामान का अलग रिकॉर्ड रखना होगा
निर्यात के लिए रखी गई इन्वेंट्री को स्पष्ट रूप से पहचानना, अलग रखना और डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करना जरूरी होगा। इसका मकसद सामान की पूरी ट्रेसबिलिटी बनाए रखना है। साथ ही, निर्यात के लिए रखे गए सामान को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी।
विदेशी ग्राहक से पैसा मिलने का इंतजार नहीं
नए मॉडल में भारतीय विक्रेता के लिए एक अहम सुविधा भुगतान से जुड़ी है। सरकार के मुताबिक EOR को तय समयसीमा के भीतर भारतीय विक्रेता को भुगतान करना होगा, भले ही विदेशी खरीदार से भुगतान अभी प्राप्त हुआ हो या नहीं। यह प्रावधान छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विदेशी ग्राहक से भुगतान आने में देरी होने पर कारोबारी की पूंजी पर दबाव पड़ सकता है।
विदेशी बिक्री की जानकारी भी मिलेगी
भारतीय विक्रेता को अपने उत्पाद की विदेश में हुई बिक्री के बारे में जानकारी मिलती रहेगी। नए ढांचे में विक्रेताओं को अंतिम बिक्री मूल्य, ऑर्डर की स्थिति और शिपमेंट ट्रैकिंग की जानकारी देने का प्रावधान है। इससे कारोबारी सिर्फ सामान बनाकर भेजने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसे अपने उत्पाद की विदेश में बिक्री और डिलीवरी की स्थिति की जानकारी भी मिल सकेगी।
एक्सपोर्ट से मिलने वाला लाभ भी विक्रेता तक पहुंचेगा
निर्यात से जुड़े रिफंड और दूसरे लाभों को भी EOR अपने पास नहीं रख सकेगा। सरकार के ढांचे के मुताबिक निर्यात रिबेट और रिफंड का हिस्सा Seller-on-Record को उसके सामान के FOB मूल्य के अनुपात में देना होगा। यानी निर्यात से जुड़े पात्र लाभों को विक्रेता तक पहुंचाने के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है।
सामान वापस आया तो क्या होगा?
विदेशी ग्राहक की ओर से सामान वापस किए जाने या ऑर्डर खारिज होने की स्थिति में भी नियम तय किए गए हैं। ऐसे सामान को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोबारा निर्यात करना, विक्रेता को लौटाना या उसका निपटान करना होगा। इससे रिटर्न और अस्वीकृत ऑर्डर के मामले में भी प्रक्रिया को एक तय ढांचे में रखने की कोशिश की गई है।
MSME और छोटे कारोबारियों को क्या फायदा?
सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय निर्माताओं, कारीगरों और MSME को वैश्विक ई-कॉमर्स बाजार से जोड़ने में मदद कर सकती है। छोटे कारोबारी अपने उत्पाद पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे, जबकि निर्यात से जुड़ी कई जटिल प्रक्रियाएं EOR के जरिए संभाली जा सकेंगी। इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि विदेशी बाजार में प्रवेश के लिए जरूरी संचालन और अनुपालन का बोझ छोटे कारोबारियों पर कम हो जाएगा।
कारोबारियों के लिए जवाबदेही भी तय
सरकार ने सुविधा देने के साथ निगरानी की व्यवस्था भी रखी है। डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखना और हर साल अनुपालन प्रमाणन कराना जरूरी होगा। इससे निर्यात की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

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