September 2, 2026

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FSSAI का एक्शन : Everest के गरम मसालों में भारी गड़बड़ी, हींग पर लगा बैन

Udaan Desk. देश भर की रसोइयों में इस्तेमाल होने वाले नामी मसालों पर अब खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने अपना शिकंजा कस दिया है। एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एफएसएसएआई ने एवरेस्ट (Everest Food Products) और लालजी गोदहू (Laljee Godhoo) जैसे जाने-माने ब्रांड्स की हींग की बिक्री पर फिलहाल रोक लगा दी है। वजह सीधी है-लैब जांच में इन कंपनियों की हींग तय मानकों से काफी नीचे और घटिया क्वालिटी की पाई गई। रेगुलेटर ने बाजार में पहले से मौजूद घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों को स्वेच्छा से वापस मंगाने की सलाह भी दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक कंपनियां निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं करतीं।

हींग की बिक्री पर रोक और जवाब-तलब
एफएसएसएआई ने न सिर्फ बिक्री पर अस्थायी बैन लगाया है, बल्कि दोनों दिग्गज कंपनियों से यह सफाई भी मांगी है कि आखिर नियमों की अनदेखी कैसे हुई। नियामक ने साफ कहा है कि कंपनियां तुरंत अपना एक्शन प्लान जमा करें और बताएं कि वे आगे से क्वालिटी के तय मानकों को कैसे बनाए रखेंगी। इसके साथ ही, कंपनियों को सलाह दी गई है कि जो घटिया माल पहले ही बाजार में पहुंच चुका है, उसे अपनी मर्जी से तुरंत वापस मंगा लें। जब तक कंपनियां सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करतीं, तब तक बिक्री पर रोक जारी रहेगी।

चिकन और गरम मसाले में भी मिलीं खामियां
सिर्फ हींग ही नहीं, बल्कि एवरेस्ट के तीन और मशहूर मसालों पर सवाल उठे हैं। जांच में पता चला है कि एवरेस्ट का एग करी मसाला, चिकन मसाला और गरम मसाला भी फूड सेफ्टी के मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। हालांकि, राहत की बात इतनी है कि फिलहाल इन तीनों मसालों की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन नोटिस जारी कर दिया गया है।

दरअसल, यह पूरा मामला एक ग्राहक की शिकायत के बाद शुरू हुआ। शिकायत मिलते ही FSSAI ने हींग बेचने वाले बड़े ब्रांड्स पर निगरानी बढ़ा दी। मुंबई में कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और गुजरात के उमरगांव में स्थित एवरेस्ट के प्लांट से जब सैंपल उठाए गए, तो रिपोर्ट हैरान करने वाली आई।

अल्कोहल एक्सट्रैक्ट में भारी कमी : नियमों के मुताबिक, प्रोसेस्ड हींग (Compounded Asafoetida) में कम से कम 5% अल्कोहल-सॉल्यूबल एक्सट्रैक्ट होना अनिवार्य है। लेकिन जांच में यह सिर्फ 0 से 3% ही मिला। इससे साफ जाहिर होता है कि कंपनियां असली कच्ची हींग का इस्तेमाल जरूरत से 30 से 40 फीसदी कम कर रही थीं।

स्टार्च की भारी मिलावट : वहीं जब लालजी गोदहू (LG) की यूनिट से ली गई कच्ची हींग की छह अलग-अलग किस्मों को जांचा गया, तो उसमें 15 से 32 फीसदी तक स्टार्च पाया गया। जबकि कानूनन यह 1 फीसदी से ज्यादा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

मसालों पर इस कड़े रुख के बीच एफएसएसएआई ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान FSSAI ने बताया कि अब ज्यादा चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट वाले पैकेज्ड फूड के पैकेट पर सामने की तरफ लाल रंग का षट्कोणीय (Hexagonal) चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

आपको बता दें कि कुछ ही दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने पैकेट वाले खाने के सामान पर स्वास्थ्य चेतावनी लेबल लगाने में हो रही देरी को लेकर FSSAI और केंद्र सरकार दोनों को सख्त फटकार लगाई थी। इस नए बदलाव का सीधा मकसद यह है कि आम ग्राहक दुकान से सामान खरीदते वक्त सिर्फ लाल निशान देखकर ही समझ जाएं कि उस पैकेट में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली चीजें ज्यादा हैं।

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