September 2, 2026

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छह साल बाद दिशा सालियान की मौत का सच सामने आएगा? बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए

Udaan Desk. दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुंबई के मालवणी स्थित 14वीं मंजिल से गिरकर हुई दिशा की मौत के सालों बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में एफआईआर दर्ज कर नए सिरे से निष्पक्ष छानबीन शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस कदम से लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे परिवार और फैंस में एक नई उम्मीद जगी है।

एफआईआर न दर्ज करने पर अदालत की कड़ी फटकार
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। जजों की पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि परिवार द्वारा गंभीर आरोप लगाने के बाद भी अब तक केवल आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज कर खानापूर्ति क्यों की गई। जब पीड़िता के पिता सतीश सालियान ने अपनी शिकायत में गंभीर आशंकाएं जाहिर की थीं, तब नियमित एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद भी आपराधिक मामला दर्ज न करना नियमों का साफ उल्लंघन है। पुलिस की इसी ढिलाई को देखते हुए कोर्ट ने अब सीबीआई को इसकी कमान सौंपना जरूरी समझा।

फोरेंसिक साक्ष्यों में सामने आईं कई बड़ी खामियां
इस हाई-प्रोफाइल केस में मेडिकल और फोरेंसिक डॉक्यूमेंट्स को लेकर भी कोर्ट कक्ष में कई सवाल उठे। याचिकर्ता के वकील ने कोर्ट के सामने तथ्य रखे कि 14वीं मंजिल जैसी ज्यादा ऊंचाई से गिरने के बाद भी शरीर पर गंभीर चोटों का सही ब्योरा रिकॉर्ड में मेल नहीं खाता। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट और मौका-ए-वारदात की तस्वीरों में कई ऐसी गड़बड़ियां पाई गईं, जिन्होंने पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी पर संदेह गहरा कर दिया। इन्हीं विरोधाभासों को आधार बनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि सच सामने लाने के लिए विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा विस्तृत पड़ताल जरूरी है।

किसी को बिना पुख्ता सबूत आरोपी न माना जाए : HC
दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि जांच के दौरान बैलेंस बनाए रखना बेहद जरूरी है।

जजों की पीठ ने अपने आदेश में साफ लिखा कि जब तक दिशा सालियान की मौत के मामले में जांच अधिकारी के पास पर्याप्त और ठोस सबूत नहीं मिल जाते, तब तक किसी भी व्यक्ति को आरोपी के रूप में प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। कानून के सिद्धांतों का पालन करते हुए सीबीआई अब नए सिरे से हर पहलू की जांच करेगी।

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