• एक्शन मोड में वक्फ बोर्ड
• राजधानी से हुई शुरुआत
भोपाल। मरहुमीन और नेकदिल लोगों की भलाई की मंशा से अल्लाह की राह में वक्फ की गई जायदाद। इन बेशकीमती जगहों पर बदनीयत लोगों का कब्जा। इन बुरे हालात से बरसों से जूझता मप्र वक्फ बोर्ड और हाथ आती निराशा। इस स्थिति से निपटने अब बोर्ड ने नई रणनीति पर काम शुरू किया है। न कोई शिकायत की जाएगी, न कोई दलील सुनी जाएगी, और न ही कानूनी पेंचीदगियों में वक्त बर्बाद किया जाएगा। सीधे अपने आधिपत्य की जगह वापसी का अभियान चलेगा। मप्र वक्फ बोर्ड इसके लिए अवाम को साथ जोड़ेगा और कार्यवाही को अंजाम देगा। इसकी शुरुआत राजधानी भोपाल की शहर के बीच बसी एक बेशकीमती जगह को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल करके कर चुका है।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में वक्फ बोर्ड के पास करीब 14,986 संपत्तियां हैं, जिनमें मस्जिद, दरगाह, कब्रिस्तान, कृषि और व्यावसायिक जमीनें आदि शामिल हैं। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के बयानों और रिपोर्ट के मुताबिक, इन दर्ज संपत्तियों का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अवैध कब्जे या अतिक्रमण के दायरे में बताया गया है।
किए जा रहे प्रयास
‘उम्मीद पोर्टल’ पर ऑनलाइन पंजीकरण और नए वक्फ कानून के तहत डेटा सामने आने के बाद बोर्ड अवैध कब्जों पर लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है, जिसमें हाल ही में भोपाल के शाहजहांनाबाद क्षेत्र में 2.7 एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर बड़ी रिकवरी और एफआईआर भी दर्ज की गई है।
नई पहल
सूत्रों का कहना है कि मप्र वक्फ बोर्ड ने एक नई पहल को अंजाम देने की तरफ कदम बढ़ाए हैं। इस पहल के तहत वर्षों से कब्जे में वक्फ संपत्ति को आजाद कराने की खुद बोर्ड, कर्मचारियों और आमजन को जोड़कर की जा रही है। इस कोशिश को पुख्ता करने के लिए कानूनी कार्यवाही को आधार बनाया जा रहा है। हाल ही में इस नवाचार का उदाहरण भोपाल स्थित एक यतीमखाने की जगह को खाली कराने के रूप में सामने आया है। हालांकि बरसों से चल रहे इस मामले में यतीमखाने को किसी तरह न छेड़ने के आदेश मप्र हाईकोर्ट दे चुका है। बताया जा रहा है कि बोर्ड, इसके कथित किरायादार और कर्मचारियों के साथ कुछ बाहरी लोगों ने मिलकर छुट्टी वाले दिनों में इस यतीमखाने पर कब्जा करने की पहल शुरू कर दी है।
तैयारी यह भी
सूत्रों का कहना है कि इस यतीमखाने को लेकर कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए यहां कई एकड़ जगह, भवन और यतीम बच्चों की शरणस्थली को अपने कब्जे में लेने के प्रयास तेज हैं। बताया जाता है कि इस कोशिश में सोमवार को बोर्ड कर्मचारी और शासन प्रशासन का अमला धावा बोलने वाला है। इससे पहले शनिवार को बोर्ड का एक कथित किरायादार एक अस्पताल प्रबंधन इस विवादित जगह के एक हिस्से पर तालेबंदी कर चुका है। बताया जा रहा है कि सोमवार की धावाबोल कार्रवाई में यतीमखाने पर पूरी तरह कब्जा करने और यहां की कमेटी को बेदखल करने की योजना है।
वक्फ संशोधन हुआ बेकार
सूत्रों का कहना है कि वक्फ बोर्ड द्वारा किसी भी संपत्ति पर अपना कब्जा बताने की विसंगतियां ही वक्फ बोर्ड संशोधन का आधार बना था। इसी के चलते वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन कर 2013 और 2025 में नया कानून लागू किया गया है। लेकिन मप्र वक्फ बोर्ड द्वारा जारी की गई मुहिम से इस संशोधन को ढेस पहुंच रही है। जानकारों का कहना है कि संस्था दारुल शफ़क्कत लंबे समय से यतीमखाने का संचालन कर रही है। जबकि बोर्ड द्वारा इस जगह को अपनी मिल्कियत बता रहा है। कानूनी पेंचीदगियों के बीच मामला तीन बार हाईकोर्ट पहुंच चुका है। वर्तमान में यहां की व्यवस्था अदालत के उस आखिरी स्थगन पर चल रही है, जिसमें सख्त लहजे में वक्फ बोर्ड, इसके सीईओ, कर्मचारी अकमल यजदानी, जीवनरेखा अस्पताल और इसके संचालक डॉ फरीद शेख को किसी भी तरह की कार्यवाही से रोका गया है। शनिवार को हो चुकी कार्यवाही और सोमवार को संभावित मामले को अदालत की अवमानना से जोड़कर बताया जा रहा है।

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