एमेजॉन ने घोषणा की कि वह भारत में ‘वॉटर पॉजिटिव’ बन गया है। इसका मतलब है कि कंपनी अपनी सीधी गतिविधियों जैसे कॉरपोरेट ऑफिस, डेटा सेंटर और फुलफिलमेंट सेंटरों में जितना पानी इस्तेमाल करती है, उससे अधिक पानी वह समुदायों को वापस कर रही है।
कंपनी ने यह घोषणा ऐसे समय की है जब आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटरों के विस्तार से पर्यावरण पर असर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। भारत में दुनिया की लगभग 18 फीसदी आबादी रहती है लेकिन उसके पास दुनिया के केवल 4 प्रतिशत मीठे पानी के संसाधन हैं। यही कारण है कि भारत को दुनिया के सबसे अधिक जल-संकट वाले देशों में गिना जाता है।
एमेजॉन ने बताया कि उसने यह लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया। कंपनी ने 2027 तक वॉटर पॉजिटिव बनने का लक्ष्य रखा था लेकिन इसे पहले ही पूरा कर लिया गया। कंपनी के अनुसार यह उपलब्धि पानी की खपत कम करके, जल शोधन और वर्षा जल संचयन प्रणाली का विस्तार करके, जल-संकट वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने वाली परियोजनाओं में निवेश करके हासिल की गई है।
वर्ष 2025 में एमेजॉन ने भारत में अपने कामकाज में जितना पानी इस्तेमाल किया, उसका 120 फीसदी पानी समुदायों को वापस पहुंचाया। कंपनी का कहना है कि इस प्रगति की नियमित आंतरिक और स्वतंत्र ऑडिट के माध्यम से पुष्टि की गई है। एमेजॉन इंडिया के उपाध्यक्ष (परिचालन) अभिनव सिंह ने कहा, ‘भारत में वॉटर पॉजिटिव बनना एक बड़ी उपलब्धि है।’

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