अररिया.
मिथिलांचल की पारंपरिक पहचान और वैश्विक सुपरफूड मखाना अब अररिया के खेतों में अपनी सफेदी बिखेरने को तैयार है। बिहार सरकार ने मखाना विकास योजना का विस्तार करते हुए अररिया समेत राज्य के 16 जिलों को इसमें शामिल किया है।
कोसी और सीमांचल के कुछ जिलों तक यह खेती अब तक मुख्य रूप से सीमित थी, लेकिन अब अररिया के किसान भी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठा सकेंगे। इस पहल के तहत मखाना की खेती करने वाले जिले के किसानों को लागत पर 75 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जाएगा। इस निर्णय से जिले के कृषि क्षेत्र में नई क्रांति आने की उम्मीद है। जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि अररिया को मखाना उत्पादन के नए क्लस्टर के रूप में पहचान मिलेगी।
एटीएम पंकज त्रिपाठी ने बताया कि बिहार सरकार ने मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके तहत मखाना की खेती करने वाले किसानों को भारी सब्सिडी (अनुदान) मिलेगी। साथ ही कौशल विकास के तहत प्रखंड स्तर पर चयनित 10 किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के तहत मखाना विकास योजना 2026-27 के तहत मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण पर 75% तक की सब्सिडी दी जा रही है। कौशल विकास के तहत, प्रखंड स्तर पर दस किसानों को मखाना की आधुनिक खेती (जैसे स्वर्ण वैदेही, सबोर मखाना) और उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
किसानों को बीज वितरण योजना के तहत रियायती दरों पर बीज मिलेगा। इसके अलावा, मखाना खेती के पारंपरिक उपकरणों के लिए भी 75% की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रखंड क़ृषि पदाधिकारी राजीव कुमार झा ने बताया कि इस योजना से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि आधुनिक तरीकों से मखाना की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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