August 6, 2026

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चांदीपुरा वायरस : गुजरात में 22 लोगों की मौत, क्या है यह बीमारी और क्यों है खतरनाक?

Udaan Desk. गुजरात में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार के अनुसार, 184 संदिग्ध मरीजों की जांच में अब तक 35 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें 22 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि सात मरीज आईसीयू में उपचाराधीन हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर संदिग्ध मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच कर रही हैं। राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और सिविल अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है। लोगों से अपील की गई है कि बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखते ही बिना देरी नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें।

क्या है चांदीपुरा वायरस ?

चांदीपुरा वायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। संक्रमण के बाद यह कुछ मामलों में तेजी से मस्तिष्क पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

चांदीपुरा वायरस की पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में हुई थी। इसी गांव के नाम पर इसका नाम रखा गया। यह रैब्डोविरिडी (Rhabdoviridae) परिवार का वायरस है और दिमाग को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, यह वायरस पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत में समय-समय पर सामने आता रहा है। मानसून के दौरान इसके मामले बढ़ने की आशंका रहती है।

कैसे फैलता है यह वायरस?
यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सामान्य संपर्क से नहीं फैलता। इसका संक्रमण मुख्य रूप से रेतीली मक्खी (सैंडफ्लाई) के काटने से होता है। कुछ शोधों में मच्छरों और टिक (किलनी) की भी भूमिका बताई गई है, लेकिन रेतीली मक्खी को इसका प्रमुख वाहक माना जाता है।

रेतीली मक्खियां अक्सर कच्चे मकानों की दीवारों की दरारों, नमी वाले स्थानों और गंदगी वाले इलाकों में पनपती हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने तथा दीवारों की दरारें भरने की सलाह देता है।

मानसून में क्यों बढ़ जाता है खतरा ?
बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से रेतीली मक्खियों की संख्या बढ़ जाती है। इसी कारण मानसून के दौरान चांदीपुरा वायरस के मामले अधिक सामने आते हैं। भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा जैसे राज्यों में समय-समय पर इसके मामले दर्ज किए गए हैं।

क्या हैं इसके लक्षण?
शुरुआत में यह संक्रमण सामान्य वायरल बुखार जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ मरीजों में बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है। इसके प्रमुख लक्षण हैं—

  1. तेज बुखार
  2. लगातार उल्टी
  3. सिरदर्द
  4. दौरे (फिट्स)
  5. अत्यधिक सुस्ती या बेहोशी
  6. मानसिक भ्रम
  7. गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन
  8. यदि बच्चे में तेज बुखार के साथ दौरे, बार-बार उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

क्या इसका इलाज या वैक्सीन है ?
फिलहाल चांदीपुरा वायरस की कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीजों का इलाज उनके लक्षणों के आधार पर किया जाता है। समय पर अस्पताल पहुंचने, आईसीयू में निगरानी और आवश्यक चिकित्सा मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

बच्चों के लिए अधिक खतरनाक क्यों ?
यह वायरस सबसे अधिक 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। संक्रमण कुछ मामलों में दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) कहा जाता है। यही कारण है कि बच्चों में इसके लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी जाती है।

कैसे करें बचाव ?
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ सावधानियां अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  1. घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
  2. कच्चे मकानों की दीवारों की दरारें भरें।
  3. बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
  4. रेतीली मक्खियों और मच्छरों के काटने से बचाव करें।
  5. बच्चों को मच्छरदानी के अंदर सुलाएं।
  6. तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल जाएं।

क्या करें

  • तेज बुखार होने पर बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
  • घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
  • बच्चों को रेतीली मक्खियों और मच्छरों के काटने से बचाएं।
  • स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करें।

क्या न करें

  • घरेलू इलाज के भरोसे समय बर्बाद न करें।
  • दौरे या बेहोशी की स्थिति को नजरअंदाज न करें।
  • अफवाहों या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें।
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