June 23, 2026

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FCRA नियम हुए सख्त : विदेशी चंदा लेने वाली धार्मिक संस्थाओं के लिए नई गाइडलाइन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाली धार्मिक और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने Foreign Contribution (Regulation) Amendment Rules, 2026 लागू करते हुए धार्मिक गतिविधियों की स्पष्ट परिभाषा तय की है और विदेशी चंदे के उपयोग, पंजीकरण तथा जवाबदेही से जुड़े नए प्रावधान जोड़े हैं।

तय की गई स्वीकार्य गतिविधियां

नए नियमों के तहत मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, मठ और अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव को धार्मिक उद्देश्य माना जाएगा। इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों के संरक्षण, अनुवाद, डिजिटलीकरण, तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, धर्मशाला, लंगर, अन्नदान और सामुदायिक रसोई जैसी गतिविधियों को भी अनुमति दी गई है।

धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर स्पष्ट रोक

गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि धार्मिक शिक्षा, सत्संग, प्रवचन, ध्यान शिविर और सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति होगी, लेकिन धर्मांतरण से संबंधित किसी भी गतिविधि को FCRA के तहत मान्यता नहीं मिलेगी।

‘की फंक्शनरी’ की नई परिभाषा लागू

संशोधित नियमों में पहली बार ‘की फंक्शनरी’ शब्द को शामिल किया गया है। अब ट्रस्टी, निदेशक, पदाधिकारी, साझेदार, HUF के कर्ता और संस्था के संचालन से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों को सीधे जवाबदेही के दायरे में लाया जाएगा।

पंजीकरण के समय बताना होगा उद्देश्य और कार्यक्षेत्र

अब विदेशी चंदा लेने वाली संस्थाओं को FCRA पंजीकरण के दौरान अपने उद्देश्य और कार्यक्षेत्र की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि वे किन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में कार्य करेंगी। पहले से पंजीकृत संगठनों को जानकारी अपडेट करने के लिए एक वर्ष का समय दिया गया है।

विदेशी नागरिकों की नियुक्ति पर सख्ती

नए नियमों के अनुसार जिन संस्थाओं के प्रमुख पदों पर विदेशी नागरिक होंगे, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में FCRA पंजीकरण नहीं मिलेगा। हालांकि विशेष मामलों में केंद्र सरकार छूट दे सकती है।

विदेशी फंड खर्च करने के लिए नई शर्त

गृह मंत्रालय ने विदेशी फंड के उपयोग को लेकर भी नया नियम बनाया है। अब किसी संस्था को अगली विदेशी फंडिंग किस्त प्राप्त करने से पहले पहले मिली राशि का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग करना होगा।

सोशल मीडिया और प्रकाशनों का ब्योरा देना होगा

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए NGOs को अपने सोशल मीडिया अकाउंट, वेबसाइट, पत्रिकाओं, पुस्तकों और अन्य प्रकाशनों की जानकारी भी सरकार को उपलब्ध करानी होगी। इससे विदेशी फंड के उपयोग और गतिविधियों की निगरानी आसान होगी।

शुल्क व्यवस्था में भी बदलाव

सरकार ने पंजीकरण शुल्क संरचना में भी बदलाव किया है। एक से अधिक उद्देश्यों या कई राज्यों में काम करने वाली संस्थाओं को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

गृह मंत्रालय का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है। साथ ही धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की स्पष्ट श्रेणी तय कर निगरानी को मजबूत करना भी इसका मकसद है।

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