September 3, 2026

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शेयर बाजार में पहली बार बड़ी कैपिटल वाले निवेशकों की हिस्सेदारी ₹10 लाख करोड़ के करीब पहुंची

Udaan Desk. भारत के हाई नेट वर्थ वाले निवेशकों यानी एचएनआई की एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में इक्विटी होल्डिंग जून तिमाही में रिकॉर्ड 9.92 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. मार्च के अंत में यह 8.10 लाख करोड़ रुपये थी. यानी केवल तीन महीनों में उनके निवेश का मूल्य 1.83 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया. प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक एचएनआई की कुल हिस्सेदारी में 22.55% की बढ़ोतरी हुई है. यह दिसंबर 2025 के 9.56 लाख करोड़ रुपये के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है.

इस बढ़ोतरी के साथ एनएसई में लिस्टेड कंपनियों में एचएनआई के इन्वेस्टमेंट वैल्यू आधारित हिस्सा 1.99% से बढ़कर 2.12% हो गया. मार्च 2022 के बाद यह उनका सबसे ऊंचा स्तर है. फ्री फ्लोट बाजार पूंजीकरण में भी उनकी हिस्सेदारी 3.98% से बढ़कर 4.25% हो गई. मुक्त-फ्लोट का मतलब ऐसे शेयरों से है जो बाजार में आम खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध हैं.

इंवेस्टमेंट बढ़ा, लेकिन हर जगह नई खरीदारी नहीं हुई
एचएनआई की कुल हिस्सेदारी का मूल्य तेजी से बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने उतनी ही मात्रा में नए शेयर खरीदे हैं. एनएसई की कंपनियों में शेयर पूंजी के प्रतिशत के हिसाब से उनकी औसत हिस्सेदारी 7.31% से घटकर 7.19% हो गई. इससे संकेत मिलता है कि पोर्टफोलियो के मूल्य में बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा शेयर कीमतों में बदलाव और ज्यादा मूल्य वाली कंपनियों में मौजूद निवेश से आया.

यानी एचएनआई की संपत्ति में बढ़ोतरी को केवल खरीदारी के नजरिये से देखना सही नहीं होगा. कुछ कंपनियों में उन्होंने खरीदारी की, जबकि दूसरी कंपनियों में शेयर बेचे. इसके बावजूद कई शेयरों में तेजी के कारण उनकी मौजूदा हिस्सेदारी का बाजार मूल्य बढ़ गया.

एचडीएफसी बैंक बना एचएनआई का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट
जून के अंत में बाजार मूल्य के आधार पर HDFC Bank Ltd एचएनआई की सबसे बड़ी होल्डिंग बन गया. इसमें उनकी हिस्सेदारी का मूल्य 28,972 करोड़ रुपये था. इसके साथ उसने रिलायंस इंडस्ट्रीज को पीछे छोड़ दिया, जहां एचएनआई की हिस्सेदारी का मूल्य 24,383 करोड़ रुपये था.

Titan Company Ltd 23,744 करोड़ रुपये की होल्डिंग के साथ अगली बड़ी एचएनआई होल्डिंग रही. इसके बाद Infosys Ltd में 17,251 करोड़ रुपये और कोटक महिंद्रा बैंक में 15,512 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी थी. बीएसई, जेएसडब्ल्यू स्टील, सुजलॉन एनर्जी, बजाज फाइनेंस और वोडाफोन आइडिया भी एचएनआई की टॉप 10 होल्डिंग्स में शामिल रहे. इन 10 कंपनियों में एचएनआई की कुल हिस्सेदारी का मूल्य करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये था, जो उनकी कुल इक्विटी होल्डिंग का लगभग 17% है.

गिरते स्टॉक में भी इंफोसिस की सबसे ज्यादा खरीदारी
जून तिमाही में एचएनआई की सबसे बड़ी अनुमानित खरीदारी इंफोसिस में हुई. उन्होंने करीब 2,859 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और उनकी हिस्सेदारी 2.44 करोड़ से अधिक शेयरों तक बढ़ी. खास बात यह रही कि इसी अवधि में इंफोसिस के शेयर में करीब 20% की गिरावट आई.

इस खरीदारी के बावजूद शेयर कीमत गिरने से इंफोसिस में एचएनआई की हिस्सेदारी का बाजार मूल्य 1,262 करोड़ रुपये घटकर 17,251 करोड़ रुपये रह गया. यानी यहां एचएनआई ने गिरावट के दौरान खरीदारी की, लेकिन कीमत में आई कमी के कारण उनके कुल निवेश का मूल्य बढ़ने के बजाय घट गया.

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में एचएनआई ने करीब 1,611 करोड़ रुपये की खरीदारी की. इसके बाद टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स में 1,370 करोड़ रुपये और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 1,298 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई. सुजलॉन एनर्जी में भी एचएनआई ने करीब 977 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.

सुजलॉन एनर्जी में खरीदारी का असर पोर्टफोलियो मूल्य पर ज्यादा साफ दिखा. तिमाही के दौरान शेयर में करीब 49% की तेजी आई. इससे कंपनी में एचएनआई की हिस्सेदारी का बाजार मूल्य 4,364 करोड़ रुपये बढ़कर 11,109 करोड़ रुपये हो गया.

अन्य प्रमुख खरीदारी में एचडीएफसी बैंक, स्विगी, आनंद राठी वेल्थ, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज ऑटो शामिल रहे. टॉप 10 खरीदारी में एचएनआई का अनुमानित निवेश कुल 11,848 करोड़ रुपये रहा.

स्विगी में गिरावट के बीच भी बढ़ाया निवेश
Swiggy Ltd भी एचएनआई की खरीदारी का एक अलग उदाहरण रही. जून तिमाही में इसके शेयर में करीब 8% की गिरावट आई, लेकिन एचएनआई ने अनुमानित 825 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. इंफोसिस और स्विगी को मिलाकर एचएनआई ने करीब 3,684 करोड़ रुपये की खरीदारी ऐसे दो शेयरों में की, जिनकी कीमत तिमाही के दौरान नीचे आई थी.

इससे पता चलता है कि एचएनआई की गतिविधि केवल तेजी वाले शेयरों तक सीमित नहीं रही. कुछ मामलों में उन्होंने शेयर कीमतों में कमजोरी के दौरान भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई.

वारी एनर्जीज में सबसे बड़ी बिक्री
दूसरी तरफ एचएनआई ने कुछ कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई भी. वारी एनर्जीज में उनकी अनुमानित शुद्ध बिक्री सबसे ज्यादा 2,031 करोड़ रुपये रही. उन्होंने करीब 63.82 लाख शेयर बेचकर हिस्सेदारी कम की. इसी दौरान कंपनी के शेयर में 5.24% की गिरावट आई.

एसजी मार्ट में एचएनआई की अनुमानित बिक्री 1,284 करोड़ रुपये रही. इसके बाद विप्रो में 568 करोड़ रुपये और बीएसई में 567 करोड़ रुपये की बिक्री हुई. शीर्ष 10 बिक्री में एचएनआई की कुल अनुमानित बिक्री 6,693 करोड़ रुपये रही.

तेजी वाले स्टॉक में भी कई जगह घटाई हिस्सेदारी
एचएनआई की गतिविधि का एक अहम पहलू यह भी रहा कि कुछ ऐसे स्टॉक में उन्होंने हिस्सेदारी घटाई, जिनमें जून तिमाही के दौरान तेज उछाल आया था. बीएसई के शेयर में 44.05% और वोडाफोन आइडिया में 69.52% की तेजी आई. स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज 247.75%, क्यूपिड 128.56% और यस बैंक 40.17% चढ़े. इसके बावजूद एचएनआई ने इन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की.

वोडाफोन आइडिया इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है. एचएनआई ने अनुमानित 456 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और उनके शेयरधारकों की संख्या करीब 6,000 कम हुई. इसके बावजूद शेयर में करीब 70% की तेजी के कारण उनकी हिस्सेदारी का बाजार मूल्य 4,154 करोड़ रुपये बढ़कर 10,894 करोड़ रुपये हो गया.

कुल मिलाकर जून तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि एचएनआई की एनएसई सूचीबद्ध कंपनियों में इक्विटी होल्डिंग का मूल्य पहली बार 10 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा है. इस दौरान कुछ कंपनियों में बड़े स्तर पर खरीदारी हुई, जबकि कुछ में बिक्री. पोर्टफोलियो के कुल मूल्य में बढ़ोतरी में शेयर कीमतों की तेजी और महंगी कंपनियों में मौजूद हिस्सेदारी का भी योगदान रहा.

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